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लोगों को कमिश्नर की जांच रिपोर्ट का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Sun, 19 Feb 2017 10:14 PM IST
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इस हालत में पहुंच गई थल-सातशिलिंग सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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थल-सातशिलिंग रोड के सुधारीकरण के नाम पर हुई घपलेबाजी में अब लोगों को कुमाऊं आयुक्त की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। 44 करोड़ रुपए की राशि खर्च करने के बाद रोड की हालत और ज्यादा बिगड़ गई है। पिछले दिनों आयुक्त डी सैंथिल पांडियन ने इसी रोड से सफर किया था। उन्होंने जिलाधिकारी को आदेश दिए थे कि रोड की जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाए।
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बताया गया कि थल से सातशिलिंग तक 49 किलोमीटर लंबी सड़क के सुधारीकरण के लिए उत्तराखंड स्टेट रोड इंप्रूवमेंट प्रोग्राम के तहत एडीबी के कंस्ट्रक्शन डिवीजन को 44 करोड़ रुपए की राशि दी गई थी। इस राशि से खतरनाक मोड़ों का कटान, संकरे स्थानों पर रोड को चौड़ा करना, नए पुलों का निर्माण करना और पूरी सड़क पर हॉटमिक्स करना शामिल था। सड़क निर्माण की जिम्मेदारी दिल्ली की प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दी गई। कंपनी ने मार्च 2015 से सड़क सुधारीकरण का काम किया और तीन महीने पहले इस काम को पूरा दिखा दिया गया है, लेकिन इस सड़क पर थल से पानी के धारे तक 150 मीटर के हिस्से पर हॉटमिक्स नहीं किया गया है।
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तड़ीगांव के पास नए पुल के निर्माण का काम अधूरा छोड़ दिया गया है। तड़ीगांव में ही एक स्थान पर सड़क इतनी खराब है कि उसमें वाहन चला पाना संभव नहीं होता। एडीबी के अधिशासी अभियंता डीपी आर्या का कहना है कि सड़क में जो भी कमियां रह गई हैं, उसे पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसी को लिखा गया है। जल्द ही सड़क की दशा सुधारी जाएगी।
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घपलेबाजों की कड़ी सजा दी जाए
सामाजिक कार्यकर्ता और व्यापारी गंगा सिंह मेहता का कहना है कि सरकारी धन की घपलेबाजी करने वालों को कड़ी सजा दी जाए। यदि सरकार इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाएगी तो भविष्य में अन्य एजेंसियों को प्रोत्साहन मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि आयुक्त से सड़क के मामले में काफी अपेक्षा है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी आश्चर्यजनक
स्थानीय निवासी महिपाल सत्याल का कहना है कि इस सड़क पर आबादी वाले इलाकों में हॉटमिक्स करना छोड़ दिया है, जबकि सबसे पहले आबादी वाले इलाकों की सड़क को सुधारा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सड़क की खराब गुणवत्ता पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी आश्चर्य में डालने वाली है।