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Pithoragarh News: पसीने से खेतों को सींचकर हरा सोना उगा रहे कानड़ी गांव के लोग
Sun, 08 Jun 2025 09:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 08 Jun 2025 09:59 PM IST
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भारत-नेपाल सीमा पर बसे कानड़ी गांव के खेतों में लहलहाती भिंडी की फसल। संवाद
पिथौरागढ़। भारत-नेपाल सीमा पर बसा कानड़ी गांव सब्जी उत्पादक गांव के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। पहाड़ के अन्य गांवों की तरह ही इसके लिए भी सिंचाई से लेकर बाजार तक की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद गांव के 100 से अधिक परिवार पसीने से सींचे गए खेतों की सब्जी और फलों को जिला मुख्यालय की मंडी तक पहुंचा रहे हैं।
पूरा पहाड़ पलायन का दंश झेल रहा है। दुर्गम ही नहीं, सुगम इलाकों में बसे गांवों के लोग भी खेती-बागवानी छोड़कर नगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कोई संसाधन तो कोई जंगली जानवरों से परेशान होकर खेती से मुंह मोड़ रहा है लेकिन जिले का कानड़ी ऐसा गांव है, जहां के ग्रामीणों ने संसाधनों के अभाव के बावजूद खेती-किसानी नहीं छोड़ी है। जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर झूलाघाट मार्ग पर स्थित कानड़ी गांव नेपाल सीमा से लगा हुआ है।
200 से अधिक परिवारों वाले इस गांव में पीने के पानी की व्यवस्था तो है लेकिन सिंचाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। खेती-बागवानी में तराई की बराबरी करने वाले इस गांव के खेतों के बीच कंक्रीट से बनीं छोटी-छोटी सिंचाई गूलें तो नजर आती हैं लेकिन अधिकांश समय ये सूखी रहती हैं। इस गांव से महज 100 मीटर की दूरी पर काली नदी बहती है लेकिन इसका पानी अब तक इन खेतों की प्यास नहीं बुझा सका है।
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किसान बताते हैं कि उनके गांव के लिए 50 साल पहले एक सिंचाई टैंक बना था। इसके बाद खेतों के बीच में कंक्रीट की गूलें तो बनीं लेकिन उनमें पानी कहां से आए, यह बड़ी समस्या है। ऐसे में सभी परिवार नलों से आने वाले पानी को छोटी-छोटी टंकियों में जमा कर सब्जियों की सिंचाई करते हैं। गांव के जगदीश चंद, ललित चंद और संतोष लाबड़ सभी किसानों से सब्जियां और फल एकत्र कर पिथौरागढ़ मंडी तक पहुंचाते हैं। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें सिंचाई की सुविधा मिलती तो खेती-बागवानी में और बेहतर उत्पादन करते। संवाद
इन फल-सब्जियों का होता है उत्पादन
गांव में फलों में आम, अमरूद, लीची, केला, पपीता जबकि सब्जियों में गोभी, मटर, प्याज, आलू शिमला मिर्च, मिर्च कटहल आदि सब्जियों का अच्छा उत्पादन होता है। यहां के कच्चे आम की भी बाजार में अच्छी मांग है। मौसमी-बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किसान करते हैं।
ग्रामीणों की बात
1...कानड़ी गांव के सौ से अधिक परिवार खेतीबाड़ी कर रहे हैं। सिंचाई की सुविधा नहीं है। यदि गांव के लिए सिंचाई नहर बने तो यहां सब्जियों का उत्पादन दोगुना हो सकता है। - लक्ष्मण चंद, पूर्व प्रधान कानड़ी
2...गांव के किसानों को रात में जागकर सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है। यदि सिंचाई की सुविधा मिले तो गांव के अन्य किसान भी फल-सब्जियों का उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकेंगे। -पूजा चंद, कानड़ी गांव
3...गांव के किसान कड़ी मेहनत कर सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। सिंचाई के साधन नहीं हैं। पास में ही काली नदी बहती है लेकिन कानड़ी गांव के खेत सूखे हैं। शासन-प्रशासन को काली नदी से कानड़ी सहित अन्य गांवों में पानी पहुंचाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। - शंकर खड़ायत, संयोजक महाकाली की आवाज
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पूरा पहाड़ पलायन का दंश झेल रहा है। दुर्गम ही नहीं, सुगम इलाकों में बसे गांवों के लोग भी खेती-बागवानी छोड़कर नगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कोई संसाधन तो कोई जंगली जानवरों से परेशान होकर खेती से मुंह मोड़ रहा है लेकिन जिले का कानड़ी ऐसा गांव है, जहां के ग्रामीणों ने संसाधनों के अभाव के बावजूद खेती-किसानी नहीं छोड़ी है। जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर झूलाघाट मार्ग पर स्थित कानड़ी गांव नेपाल सीमा से लगा हुआ है।
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200 से अधिक परिवारों वाले इस गांव में पीने के पानी की व्यवस्था तो है लेकिन सिंचाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। खेती-बागवानी में तराई की बराबरी करने वाले इस गांव के खेतों के बीच कंक्रीट से बनीं छोटी-छोटी सिंचाई गूलें तो नजर आती हैं लेकिन अधिकांश समय ये सूखी रहती हैं। इस गांव से महज 100 मीटर की दूरी पर काली नदी बहती है लेकिन इसका पानी अब तक इन खेतों की प्यास नहीं बुझा सका है।
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किसान बताते हैं कि उनके गांव के लिए 50 साल पहले एक सिंचाई टैंक बना था। इसके बाद खेतों के बीच में कंक्रीट की गूलें तो बनीं लेकिन उनमें पानी कहां से आए, यह बड़ी समस्या है। ऐसे में सभी परिवार नलों से आने वाले पानी को छोटी-छोटी टंकियों में जमा कर सब्जियों की सिंचाई करते हैं। गांव के जगदीश चंद, ललित चंद और संतोष लाबड़ सभी किसानों से सब्जियां और फल एकत्र कर पिथौरागढ़ मंडी तक पहुंचाते हैं। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें सिंचाई की सुविधा मिलती तो खेती-बागवानी में और बेहतर उत्पादन करते। संवाद
इन फल-सब्जियों का होता है उत्पादन
गांव में फलों में आम, अमरूद, लीची, केला, पपीता जबकि सब्जियों में गोभी, मटर, प्याज, आलू शिमला मिर्च, मिर्च कटहल आदि सब्जियों का अच्छा उत्पादन होता है। यहां के कच्चे आम की भी बाजार में अच्छी मांग है। मौसमी-बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किसान करते हैं।
ग्रामीणों की बात
1...कानड़ी गांव के सौ से अधिक परिवार खेतीबाड़ी कर रहे हैं। सिंचाई की सुविधा नहीं है। यदि गांव के लिए सिंचाई नहर बने तो यहां सब्जियों का उत्पादन दोगुना हो सकता है। - लक्ष्मण चंद, पूर्व प्रधान कानड़ी
2...गांव के किसानों को रात में जागकर सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है। यदि सिंचाई की सुविधा मिले तो गांव के अन्य किसान भी फल-सब्जियों का उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकेंगे। -पूजा चंद, कानड़ी गांव
3...गांव के किसान कड़ी मेहनत कर सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। सिंचाई के साधन नहीं हैं। पास में ही काली नदी बहती है लेकिन कानड़ी गांव के खेत सूखे हैं। शासन-प्रशासन को काली नदी से कानड़ी सहित अन्य गांवों में पानी पहुंचाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। - शंकर खड़ायत, संयोजक महाकाली की आवाज