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टैक्सियों की हड़ताल से यात्री दूसरे दिन भी परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 06 Oct 2018 10:29 PM IST
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पिथौरागढ़ के सिल्थाम में धारचूला को जाने वाली बस में चढ़ते यात्री
- फोटो : अमर उजाला
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स्पीड गवर्नर के विरोध में टैक्सी चालकों ने दूसरे दिन भी संचालन बंद रखा। इस कारण यात्री काफी परेशान रहे। घंटों इंतजार के बाद लोगों को वापस लौटना पड़ा। टैक्सियों की हड़ताल से कस्बों में समाचार पत्र, डाक और दूध की आवश्यक सेवाएं भी बाधित रही।
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शनिवार को भी पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट, कनालीछीना, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग सहित सभी स्थानों पर टैक्सियों का संचालन बंद रहा। पिथौरागढ़ से किसी भी रूट के लिए जीपें संचालित नहीं हुई। इस दौरान जीप चालकों ने यूनियन अध्यक्ष त्रिलोक महर के नेतृत्व में प्रदर्शन कर नाराजगी जताई।
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लगातार दूसरे दिन भी जीपों का संचालन नहीं होने से आम लोगों के साथ ही कर्मचारी वर्ग भी परेशान रहा। जिला मुख्यालय से टनकपुर और हल्द्वानी रूटों पर बसों का नियमित संचालन होने से यात्रियों को अधिक परेशानी नहीं हुई, लेकिन जिले के आंतरिक मार्गों पर यात्री परेशान रहे। घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को वाहन नहीं मिले। मैदानी क्षेत्र को छोड़कर जिले की अधिकतर यातायात व्यवस्था जीपों पर ही निर्भर है। ऐसे में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोग गांवों से जरूरी कार्यों से जिला मुख्यालय नहीं आ पा रहे हैं।
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उधर, धारचूला में भी जीपों का संचालन पूरी तरह से ठप रहा। महासंघ टैक्सी यूनियन कुमाऊं मंडल के उपाध्यक्ष केशर सिंह धामी के नेतृत्व में टैक्सी चालकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में जय छिपलाकेदार टैक्सी यूनियन के नंदन सिंह ह्यांकी, रूप सिंह जेठा, बिहारी लाल विश्वकर्मा, श्रवण कुमार, शेर सिंह, महाकाली टैक्सी यूनियन के दान सिंह, दीपक सिंह, हरीश गुंज्याल, हरीश नाथ, प्रेम सिंह, महेंद्र सिंह, चंचल सिंह आदि थे।
ओवरलोड होने पर बस से उतारे यात्री
पिथौरागढ़। धारचूला के लिए सुबह के समय कोई बस नहीं है। ऐसे में मैदानी क्षेत्रों से आई बस जैसे ही सिल्थाम पहुंची यात्रियों में बस में चढ़ने के लिए होड़ मच गई। पहली बस में क्षमता से अधिक यात्री चढ़ने पर पुलिस ने खड़े यात्रियों को उतारा। अन्य यात्री दूसरी बसों से कनालीछीना रूट से गंतव्य को रवाना हुए। थल और डीडीहाट के लिए यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एआरएम राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि धारचूला रूट पर प्रतिदिन पांच बसें, जबकि झूलाघाट के लिए तीन बसें संचालित होती हैं।