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लोगों का प्रयास भी नहीं बचा सकी पार्वती की जान
ब्यूरो/अमर उजाला,मुनस्यारी /पिथौरागढ़
Updated Sat, 20 Feb 2016 10:35 PM IST
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पातो गांव की जिस महिला को गांव के लोग सड़क न होने की वजह से खतरनाक पहाड़ी रास्ते से 12 किमी तक स्ट्रेचर पर रखकर लाए थे उनका अथक प्रयास भी महिला की जान नहीं बचा पाया।
पार्वती देवी नाम की इस महिला की हल्द्वानी अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। यदि गांव तक सड़क होती तो शायद पार्वती को समय पर इलाज मिल जाता और उसकी जान बच जाती। गांव के लोगों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ इस बात को लेकर बहुत गुस्सा है।
पातो गांव के श्याम सिंह की पत्नी पार्वती देवी (42) बृहस्पतिवार रात नौ बजे छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। पैदल रास्ता बेहद खराब होने के कारण गांव के लोग उसे रात में ही ला पाने का साहस नहीं कर पाए। शुक्रवार सुबह पार्वती को स्ट्रेचर से 12 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रोड हेड भापा पहुंचाया गया। वहां से उसे एक वाहन की व्यवस्था कर सीधे हल्द्वानी ले जाया गया। रात करीब 12 बजे ये लोग हल्द्वानी तो पहुंच गए, लेकिन पार्वती की जान नहीं बचा पाए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही पार्वती की जान चली गई।
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मुनस्यारी में मुख्यमंत्री ने पहले एलान किया था कि गंभीर रोगियों को ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन इसकी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई। मुनस्यारी से हल्द्वानी जाने में इन लोगों को पूरे नौ घंटे लग गए। यदि पार्वती को समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच जाती। गांव के समाजसेवी हरीश दरियाल ने कहा कि पार्वती की मौत मुख्यमंत्री की घोषणा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
मुख्यमंत्री ने नौ माह पहले पातो का दौरा कर सड़क बनाने का एलान किया था। अब तक सड़क निर्माण की कोई तैयारी या सर्वे तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कम से कम गरीब श्याम सिंह को इस घटना के बाद पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए। क्योंकि पार्वती की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार है।
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पार्वती देवी नाम की इस महिला की हल्द्वानी अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। यदि गांव तक सड़क होती तो शायद पार्वती को समय पर इलाज मिल जाता और उसकी जान बच जाती। गांव के लोगों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ इस बात को लेकर बहुत गुस्सा है।
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पातो गांव के श्याम सिंह की पत्नी पार्वती देवी (42) बृहस्पतिवार रात नौ बजे छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। पैदल रास्ता बेहद खराब होने के कारण गांव के लोग उसे रात में ही ला पाने का साहस नहीं कर पाए। शुक्रवार सुबह पार्वती को स्ट्रेचर से 12 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रोड हेड भापा पहुंचाया गया। वहां से उसे एक वाहन की व्यवस्था कर सीधे हल्द्वानी ले जाया गया। रात करीब 12 बजे ये लोग हल्द्वानी तो पहुंच गए, लेकिन पार्वती की जान नहीं बचा पाए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही पार्वती की जान चली गई।
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मुनस्यारी में मुख्यमंत्री ने पहले एलान किया था कि गंभीर रोगियों को ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन इसकी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई। मुनस्यारी से हल्द्वानी जाने में इन लोगों को पूरे नौ घंटे लग गए। यदि पार्वती को समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच जाती। गांव के समाजसेवी हरीश दरियाल ने कहा कि पार्वती की मौत मुख्यमंत्री की घोषणा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
मुख्यमंत्री ने नौ माह पहले पातो का दौरा कर सड़क बनाने का एलान किया था। अब तक सड़क निर्माण की कोई तैयारी या सर्वे तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कम से कम गरीब श्याम सिंह को इस घटना के बाद पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए। क्योंकि पार्वती की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार है।