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Pithoragarh News: जीआईसी गंगोलीहाट में अभिभावकों ने की प्रवक्ताओं की तैनाती
Tue, 20 Oct 2026 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 20 Oct 2026 11:22 PM IST
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गंगोलीहाट(पिथौरागढ़)। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अभिभावक कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसा ही हुआ है गंगोलीहाट में। जब विभाग जीआईसी में कॉमर्स, इतिहास, अर्थशास्त्र और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं कर पाया तो अपने बच्चों की चिंता में अभिभावकों को इसके लिए आगे आना पड़ा।
अभिभावकों ने किसी तरह इतिहास, कॉमर्स और अर्थशास्त्र पढ़ाने के लिए शिक्षक खोजे। अभिभावक ही खुद धन एकत्र कर इन शिक्षकों को मानदेय दे रहे हैं ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
विद्यालय में शिक्षकों के खाली पदों की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि छात्र संख्या में साल-दर-साल लगातार गिरावट आ रही है। पांच वर्ष पूर्व तक विद्यालय में 650 से अधिक छात्र संख्या वाले इस विद्यालय में अब 300 विद्यार्थी रह गए हैं। 11 वर्षों से विद्यालय में वाणिज्य विषय के प्रवक्ता का पद खाली पड़ा है।
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अर्थशास्त्र और इतिहास की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। छात्रों के लिए इन विषयों का ज्ञान लेना मुश्किल हुआ तो अभिभावकों की चिंता बढ़ गई।
पीटीए अध्यक्ष प्यारे लाल साह ने कहा कि अभिभावक कब तक अपनी जेब से शिक्षकों का वेतन देते रहेंगे। यदि जल्द प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं हुई तो हमें आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
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अभिभावकों ने किसी तरह इतिहास, कॉमर्स और अर्थशास्त्र पढ़ाने के लिए शिक्षक खोजे। अभिभावक ही खुद धन एकत्र कर इन शिक्षकों को मानदेय दे रहे हैं ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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विद्यालय में शिक्षकों के खाली पदों की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि छात्र संख्या में साल-दर-साल लगातार गिरावट आ रही है। पांच वर्ष पूर्व तक विद्यालय में 650 से अधिक छात्र संख्या वाले इस विद्यालय में अब 300 विद्यार्थी रह गए हैं। 11 वर्षों से विद्यालय में वाणिज्य विषय के प्रवक्ता का पद खाली पड़ा है।
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अर्थशास्त्र और इतिहास की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। छात्रों के लिए इन विषयों का ज्ञान लेना मुश्किल हुआ तो अभिभावकों की चिंता बढ़ गई।
पीटीए अध्यक्ष प्यारे लाल साह ने कहा कि अभिभावक कब तक अपनी जेब से शिक्षकों का वेतन देते रहेंगे। यदि जल्द प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं हुई तो हमें आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।