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पंचेश्वर बांध के सामने विस्थापन की समस्या से पार पाने की चुनौती

Wed, 22 Feb 2017 09:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट Updated Wed, 22 Feb 2017 09:51 PM IST
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Pancheshwar dam in front of the challenge of overcoming the problem of displacement
पंचेश्वर बांध को लेकर नेपाल के लोगों से रायशुमारी करते ज्वाइंट फोरम के सदस्य - फोटो : अमर उजाला

पंचेश्वर बांध को लेकर अब विस्थापन का मुद्दा भी सर उठाने लगा है। बुधवार को नेपाल और भारत के प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने विस्थापन का पूरा खाका सामने न रखने और विस्थापन की पूर्ण व्यवस्था न होने पर विरोध जताने की चेतावनी दी। कुछ समय पहले ही चुनाव में पिथौरागढ़ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बांध के फायदे गिनाए थे और कहा था कि क्षेत्र के विकास में यह बांध मील का पत्थर साबित होगा।

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बुधवार को झूलाघाट के लोगों ने इंडो-नेपाल ज्वाइंट एक्शन फोरम (आईएनजेएएफ) की टीम ने बात की। महाकाली के किनारे बसे नेपाल के गांवों के लोग पंचेश्वर बांध को लेकर आशंका में हैं। उनको डूब क्षेत्र में आने पर विस्थापन का डर सता रहा है। बाजार व्यवस्थापन समिति के अध्यक्ष जय सिंह भाट ने बताया कि सरकार विस्थापित लोगों को उचित मुआवजा, रोजगार, रहने के लिए घर और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए। विस्थापित होने वाले लोगों का हित सबसे पहले देखा जाए। नेपाल के सीमावर्ती गांवों के लोग बांध को लेकर सशंकित हैं। विस्थापन की सही व्यवस्था न होने पर बांध के विरोध में लोग खड़े हो जाएंगे।
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बैतड़ी जिले में महाकाली नदी के किनारे के बसे भारत स्थित सेरा, बलतड़ी, ताकुला आदि गांवों के लोगों ने भी फोरम के सामने अपनी बात रखी। इनका कहना था कि विस्थापन की सही व्यवस्था न हुई तो विरोध करेंगे। विश्व मानवाधिकार संगठन के कमल भट्ट, नेपाल के तेज राम और जूलाघाट के दशरथ खड़ायत, प्रकाश थापा, हरीश भट्ट, नारायण सिंह खड़ायत, गोपाल, डंबर आदि ने टीम के सदस्यों के सामने अपनी बात रखी।
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नेपाल की राजधानी काठमांडू से आए फोरम के संयोजक अशोक कुमार जेरू ने बताया कि बांध के पक्ष और विपक्ष की विस्तृत रिपोर्ट दोनों सरकारों को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि फोरम के कार्यालय काठमांडू, दिल्ली, महेंद्रनगर और बनबसा में हैं।


12 फरवरी को पिथौरागढ़ में हुई चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 35 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले पंचेश्वर बांध के फायदे गिनाते हुए कहा था कि इस बांध से छह हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। बांध का निर्माण कार्य शुरू होने पर पिथौरागढ़ जिले में रोजगार के कई अवसर खुलेंगे। 

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