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27 जुलाई की आपदा के बाद डर से नहीं आती है नींद
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लुमती के भोटिया खेड़े के प्रभावित लोग।
- फोटो : PITHORAGARH
धारचूला (पिथौरागढ़)। लुम्ती के भोटिया खेड़ा के लोग आपदा के कहर से डरे हुए हैं। 27 जुलाई की रात आई आपदा के बाद से ये परिवार न तो ठीक से खा पाते हैं और न ही ठीक से सो पाते हैं। तेज बारिश में किसी अनहोनी के डर से हर समय जागे रहना पड़ता है।
भोटियाखेड़ा निवासी चंद्रा सुमत्याल ने बताया कि 27 जुलाई से हमारे गांव के ऊपरी देवलेक पहाड़ी से लगातार भूकटाव हो रहा है। नीचे गोरी नदी का कटाव और 50 मीटर दूर लम्तीगाड़ के गांव की ओर रुख करने से डर लगा रहता है। मंगलवार रात की बारिश से लुम्तीगाड़ का मलबा हमारे गांव की ओर आने लगा। उन्होंने बताया कि हमारे गांव के लोग 28 जुलाई की आपदा से ही ना ही ढंग से सो पा रहे और ना ही खा पा रहे हैं। 14 परिवारों के लोग रोज सुबह अपने घर जानवरों को चारा देने आते हैं और शाम होते ही दो किमी दूर रिश्तेदारों के घर रहने चले जाते हैं।
प्रहलाद सिंह ने बताया गांव को तीन जगह से खतरा बना है, इसलिए हम लोग रात को किसी सुरक्षित जगह चले जाते हैं। हम सब लोग काफी डरे सहमे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक कुमार ने बताया कि ऊपर देवलेक की पहाड़ी से हो रहे भूकटाव को देखते हुए तल्ला लुम्ती के 30 परिवार जीआईसी बरम शिविर में रहने लगे हैं। उन्होंने प्रशासन से भोटिया खेड़े के प्रभावित लोगों की उचित रहने की व्यवस्था करने की मांग की है।
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भोटियाखेड़ा निवासी चंद्रा सुमत्याल ने बताया कि 27 जुलाई से हमारे गांव के ऊपरी देवलेक पहाड़ी से लगातार भूकटाव हो रहा है। नीचे गोरी नदी का कटाव और 50 मीटर दूर लम्तीगाड़ के गांव की ओर रुख करने से डर लगा रहता है। मंगलवार रात की बारिश से लुम्तीगाड़ का मलबा हमारे गांव की ओर आने लगा। उन्होंने बताया कि हमारे गांव के लोग 28 जुलाई की आपदा से ही ना ही ढंग से सो पा रहे और ना ही खा पा रहे हैं। 14 परिवारों के लोग रोज सुबह अपने घर जानवरों को चारा देने आते हैं और शाम होते ही दो किमी दूर रिश्तेदारों के घर रहने चले जाते हैं।
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प्रहलाद सिंह ने बताया गांव को तीन जगह से खतरा बना है, इसलिए हम लोग रात को किसी सुरक्षित जगह चले जाते हैं। हम सब लोग काफी डरे सहमे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक कुमार ने बताया कि ऊपर देवलेक की पहाड़ी से हो रहे भूकटाव को देखते हुए तल्ला लुम्ती के 30 परिवार जीआईसी बरम शिविर में रहने लगे हैं। उन्होंने प्रशासन से भोटिया खेड़े के प्रभावित लोगों की उचित रहने की व्यवस्था करने की मांग की है।
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