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Pithoragarh News: जैविक रंग बनाने में दक्ष हो रही हैं महिलाएं
Wed, 01 Mar 2023 10:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 01 Mar 2023 10:14 PM IST
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पिथौरागढ़। ग्रामीण उद्यम वेग परियोजना (रीप) के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को जैविक रंग बनाने में दक्ष किया जा रहा है। भविष्य में महिलाएं मौसमी फूलों से प्राकृतिक रंग बनाकर अपनी आजीविका में भी इजाफा कर पाएंगी।
रीप परियोजना इन दिनों कनालीछीना के ध्वज आजीविका स्वायत्त सहकारिता समिति से जुड़ी सात महिलाओं को प्योली, बुरांश, गैंदा, गुलाब और हल्दी से फूलों से रंग बनाने का प्रशिक्षण दे रही है। इन महिलाओं को रंग बनाते देख आसपास के लोग भी इनसे खरीदने को पहुंच रहे हैं। रीप परियोजना के जिला प्रबंधक प्रतीम भट्ट ने बताया कि जैविक रंग प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किए जा रहे हैं। शीघ्र ही अन्य जगहों पर भी महिलाओं को जैविक रंग बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण एवरेस्ट विजेता मनीष कसनियाल, शोभित पांडे दे रहे हैं।
बाजार में भी उपलब्ध कराया जाएगा रंग
पिथौरागढ़। प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए जा रहे जैविक रंग की कीमत 200 रुपये किलो रखी है। ग्रामीण महिलाओं को रंग बनाने में दक्ष बनाने के पीछे उनको आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जाना है। रीप परियोजना के जिला प्रबंधक प्रतीम भट्ट ने बताया कि भविष्य में जैविक रंग को बाजार में उतारा जाएगा ताकि इससे जुड़ी महिलाओं की आय में सुधार होगा। संवाद
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रीप परियोजना इन दिनों कनालीछीना के ध्वज आजीविका स्वायत्त सहकारिता समिति से जुड़ी सात महिलाओं को प्योली, बुरांश, गैंदा, गुलाब और हल्दी से फूलों से रंग बनाने का प्रशिक्षण दे रही है। इन महिलाओं को रंग बनाते देख आसपास के लोग भी इनसे खरीदने को पहुंच रहे हैं। रीप परियोजना के जिला प्रबंधक प्रतीम भट्ट ने बताया कि जैविक रंग प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किए जा रहे हैं। शीघ्र ही अन्य जगहों पर भी महिलाओं को जैविक रंग बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण एवरेस्ट विजेता मनीष कसनियाल, शोभित पांडे दे रहे हैं।
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बाजार में भी उपलब्ध कराया जाएगा रंग
पिथौरागढ़। प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए जा रहे जैविक रंग की कीमत 200 रुपये किलो रखी है। ग्रामीण महिलाओं को रंग बनाने में दक्ष बनाने के पीछे उनको आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जाना है। रीप परियोजना के जिला प्रबंधक प्रतीम भट्ट ने बताया कि भविष्य में जैविक रंग को बाजार में उतारा जाएगा ताकि इससे जुड़ी महिलाओं की आय में सुधार होगा। संवाद
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