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Pithoragarh News: चेक बाउंस के दोषी को एक माह का कारावास
Wed, 29 Jan 2025 11:03 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:03 PM IST
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पिथौरागढ़। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने चेक बाउंस के दोषी को एक माह कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 30 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में निर्णय की तिथि से एक माह के भीतर देने होंगे।
मामले के अनुसार छह फरवरी 2024 को दोस्ताना संबंध होने के कारण दीपक राम ने संजय कुमार से पल्सर बाइक वाहन बेचने की बात कहकर 22 हजार रुपये नगद लिए। इसके बाद उसने न तो वाहन दिया और न ही वाहन को उसके नाम पर किया। धनराशि वापस मांगने पर दीपक राम ने 26 फरवरी 2024 की तारीख दर्ज कर अपने खाते का एक चेक दिया। बैंक ने खाते में धनराशि नहीं होने पर चेक वापस कर दिया।
संजय कुमार ने अधिवक्ता के माध्यम से 22 मार्च 2024 को दीपक राम को नोटिस भेजा। बावजूद इसके धनराशि वापस नहीं की गई। इस पर मौखिक और साक्ष्यों के आधार पर दीपक राम को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में न्यायालय में तलब किया गया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था। बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने आरोपी दीपक राम को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में दोषसिद्ध करार देते हुए एक माह कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी को 30 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में निर्णय की तिथि से एक माह के भीतर देने होंगे।
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मामले के अनुसार छह फरवरी 2024 को दोस्ताना संबंध होने के कारण दीपक राम ने संजय कुमार से पल्सर बाइक वाहन बेचने की बात कहकर 22 हजार रुपये नगद लिए। इसके बाद उसने न तो वाहन दिया और न ही वाहन को उसके नाम पर किया। धनराशि वापस मांगने पर दीपक राम ने 26 फरवरी 2024 की तारीख दर्ज कर अपने खाते का एक चेक दिया। बैंक ने खाते में धनराशि नहीं होने पर चेक वापस कर दिया।
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संजय कुमार ने अधिवक्ता के माध्यम से 22 मार्च 2024 को दीपक राम को नोटिस भेजा। बावजूद इसके धनराशि वापस नहीं की गई। इस पर मौखिक और साक्ष्यों के आधार पर दीपक राम को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में न्यायालय में तलब किया गया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था। बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने आरोपी दीपक राम को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में दोषसिद्ध करार देते हुए एक माह कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी को 30 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में निर्णय की तिथि से एक माह के भीतर देने होंगे।
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