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Exclusive: पुणे की नुपूर ने बहन के साथ बदली महिलाओं की तकदीर, शोध के लिए आई थी उत्तराखंड; जानिए इनकी कहानी

Tue, 17 Sep 2024 01:13 PM IST
हीरा मेहरा संजय भट्ट, संवाद
संजय भट्ट, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 17 Sep 2024 01:13 PM IST
सार

नूपुर पोहरकर उत्तराखंड में रूरल डेवलपमेंट ग्रामीण विकास पर शोध के लिए आई थी। पेशे से पशु चिकित्सक नुपुर आज अपनी फैशन डिजाइनर बहन बहन सरवरी के साथ मिलकर पिरुल से उत्पाद बनाकर स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आजीविका बढ़ा रही हैं। 

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Nupur from pune along with her sister changed the fate of women in champawat
नुपूर और सरवरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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चंपावत जिले में वर्ष 2020 में एसबीआई यूथ फाउंडेशन पुणे महाराष्ट्र की नूपुर पोहरकर उत्तराखंड में रूरल डेवलपमेंट ग्रामीण विकास पर शोध के लिए आई थी। पेशे से पशु चिकित्सक नुपुर आज अपनी फैशन डिजाइनर बहन बहन सरवरी के साथ मिलकर पिरुल से उत्पाद बनाकर खुद तो रोजगार कर ही रही हैं, साथ ही स्थानीय महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आजीविका बढ़ा रही हैं। इस काम में उनकी बहन सरवरी ने भी साथ दिया।

नूपुर वर्ष 2021 से अपनी बहन सरवरी के साथ पिरुल से आकर्षक हैंडीक्राफ्ट उत्पाद बना रही हैं। सरवरी ने बताया कि खेतीखान के आसपास पिरूल का बहुत अधिक कचरा हो जाता है। पिरुल से जंगलों में आग तो लगती ही है, यह जलस्तर को भी कम कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय महिलाओं को जोड़कर ग्रामीण विकास के लिए कार्य किया और स्टार्टअप पिरूल हैंडीक्राफ्ट्स को लांच करने के बाद कॉयलिंग तकनीक का उपयोग करके चाय कोस्टर जैसे सरल उत्पाद बनाने लगीं।

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बताया कि शुरुआत में एक अन्य महिला को शामिल किया। इसके बाद लगातार महिलाओं की संख्या बढ़ती गई। खेतीखान क्षेत्र के आसपास के धुनाघाट, पाटी, त्यारसो, चानमारी, बाराकोट, लोहाघाट आदि क्षेत्रों की 100 से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा। उन्होंने बताया कि यहां बने चीड़ के उत्पादों को देश के कोने-कोने में बेच रहे हैं। इनके ऑर्डर भी मिल रहे हैं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार भी उनकी मदद कर रही है। इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। संवाद

बन रही आत्मनिर्भर
पिरूल हैंडीक्राफ्ट से जुड़ी सुनीता मौनी ने बताया कि वह दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र चौड़कोट में रहती थी। अब बच्चों की पढ़ाई के लिए खेतीखान में रहती है। पुणे की नूपुर के साथ मिलकर पिरूल हैंडीक्राफ्ट कार्य से जुड़ी है। कहा कि चीड़ के कचरे से खूबसूरत क्राफ्ट आइटम बनाए जा सकते हैं। हर दिन नए डिजाइन बनाना रोचक रहता है। मासिक आय 1500 से बढ़कर पांच हजार रुपये हो गई है।  

नुपूर पशु चिकित्सक और सरवरी हैं फैशन डिजाइनर
पुणे निवासी 28 वर्षीय नुपूर नागपुर में पशु चिकित्सक हैं। वह समय-समय पर खेतीखान आकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती रहती हैं। 25 वर्षीय उनकी छोटी बहन सरवरी फैशन डिजाइनर हैं। उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है। उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाना है। बताया कि पिरुल (चीड़ के पत्ताें) से बने हैंडीक्राफ्ट के उत्पादों की मांग अमेरिका, बेंगलूरू, दिल्ली और हैदराबाद तक है। 

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