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फसलों पर अब सूखे की भी मार
दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 25 Nov 2016 10:13 PM IST
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पिथौरागढ़ में खेतों पर दिखने लगा सूखे का असर
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी की मार झेल रहे किसानों पर अब मौसम की भी मार है। अक्तूबर में औसत से कम बारिश और नवंबर में अभी तक बारिश न होने से किसानों को सूखे के हालात का सामना करना पड़ रहा है। गेहूं, जौ, मसूर और चना की फसल सूखने लगी है। कृषि विशेषज्ञों ने करीब 30 प्रतिशत फसल के नुकसान होने की आशंका जताई है। जिले में अधिकतर असिंचित क्षेत्र है और बारिश न होने से सब्जी उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित है।
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नोटबंदी के कारण किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब किसानों पर मौसम की भी मार है। मौसम विभाग ने कम से कम इस महीने के शेष दिनों में बारिश के कोई संकेत नहीं दिए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अक्तूबर में यहां पर औसत वर्षा 65.3 मिलीमीटर हुआ करती थी। इस बार बारिश सिर्फ 9 मिलीमीटर पर ही सिमट गई। छह अक्तूबर के बाद अब तक बारिश नहीं हुई है। नवंबर में औसत वर्षा का आंकड़ा 12.5 मिलीमीटर रहता है, लेकिन महीना बीतने को है और बारिश की एक बूंद नहीं गिरी है। मौसम विभाग के अनुसार नवंबर के शेष दिनों में भी बारिश की संभावना नहीं है।
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जिले में इस बार गेहूं की फसल 26331 हेक्टेयर में बोई गई है। इसमें से मात्र 2757 हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। कई स्थानों पर वर्षाकाल में टूटी नहरों की मरम्मत नहीं होने से खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसी तरह जिले में 3537 हेक्टेयर में जौ की फसल बोई गई है। इसमें से मात्र 40 हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा है। मसूर इस बार 4442 हेक्टेयर में बोया गया है। इसमें से 428 हेक्टेयर में ही सिंचाई का पानी मिल पा रहा है। शेष फसल वर्षा के पानी पर निर्भर है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि बारिश नहीं होने से कई बीज तो उगे नहीं हैं। जो पौधे उगे हैं, उनकी बढ़त कम हो रही है। ऐसे में उत्पादन पर कम से कम 30 फीसदी का असर पड़ेगा। यदि जल्दी बारिश नहीं होती तो नुकसान का यह आंकड़ा बढ़ जाएगा।
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उन्होंने कहा कि यदि अक्तूबर में अच्छी बारिश हो जाती तो जमीन में अब तक नमी रहती, लेकिन अक्तूबर में हुई नाममात्र की बारिश से अचानक सूखे की स्थिति सामने आने लगी है। पहाड़ पर जाड़ों के मौसम में हरी सब्जी खूब उगाई जाती है। पालक, राई, मेथी, धनिया, मटर जैसी सब्जियों पर सूखे की मार पड़ने लगी है।