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अब सेना को भी राहत, चीन सीमा पर आसानी से पहुंच सकेगा सैन्य सामान और रसद
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अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। चीन सीमा के लिए बनी घट्टाबगढ़-लीपूलेख सड़क का वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए ऑनलाइन उद्घाटन देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस सड़क बनने से सीमा पर सेना के साजो सामान और रसद की आपूर्ति आसानी से होगी। कैलाश मानसरोवर यात्रा सुगम हो जाएगी। सीमांत के गांवों में रहने वाले लोगों को यातायात की सुविधा मिलेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि सड़कों का राष्ट्र के निर्माण में अहम योगदान होता है। बीआरओ द्वारा निर्मित इस महत्वपूर्ण सड़क को देश की जनता को समर्पित करते हुए उन्हें अपार खुुशी हो रही है। कैलाश यात्रा पर जाने वाले लोगों के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों और सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों को इस सड़क के बनने की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। कहा कि बीआरओ ने विपरीत परिस्थितियों में इस सड़क का निर्माण कार्य पूरा किया है। उन्होंने इसके लिए बीआरओ की प्रशंसा करते हुए बधाई का पात्र बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सड़क निर्माण में कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। उन्होंने जान गंवाने वाले जवानों और मजदूरों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। सड़क बनने से बेहद लंबी और कठिन कैलाश यात्रा अब सुगम हो जाएगी। कैलाश यात्रा रूट होने की वजह से यह स्थल पवित्र है। स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही व्यापारियों को फायदा मिलेगा। सड़क की कनेक्टिविटी होने से विकास को बल मिलेगा। पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधाएं बढ़ेंगी। वीडियो कांफ्रेसिंग से रक्षामंत्री के संबोधन के बाद नैनीसैनी एयरपोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सेना के धर्मगुरुओं ने मंत्रोच्चार किया। बीआरओ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने पूूजा अर्चना करने के बाद नारियल तोड़ा। इसके बाद रक्षा मंत्री के निर्देश पर बीआरओ के वाहनों को डीएम डा.विजय कुमार जोगदंडे ने हरी झंडी दिखाकर गुंजी के लिए रवाना किया। सामरिक महत्व की सड़क के उद्घाटन अवसर पर एसपी प्रीति प्रियदर्शनी, एसडीएम तुषार सैनी, बीआरओ के कर्नल सोमेंद्र बनर्जी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम को देखते हुए एयरपोर्ट और एयरपोर्ट के बाहर सीओ आरएस रौतेला के नेतृत्व में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उधर दिल्ली में वीडिओ कांफ्रेसिंग में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद अजय टम्टा, सीडीएस विपिन रावत, बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह मौजूद रहे। -:: सड़क निर्माण में अभियंता समेत नौ लोगों को खोना पड़ा ::- पिथौरागढ़। चीन सीमा पर स्थित लीपूलेख के लिए 1999 से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। तवाघाट से लीपूलेख तक कुल 95 किमी सड़क की कटिंग का काम पूरा हो गया है। तवाघाट से गरबाधार तक 2008 में ही सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया था। 2014 के बाद सड़क निर्माण में काफी तेजी आई। तवाघाट से गुंजी तक कठिन चट्टानें होने के कारण सड़क निर्माण में काफी कठिनाईयां आईं और जानें गवांनी पड़ी। लखनपुर और नजंग की पहाड़ियों को काटना बेहद कठिन था। काटने में पिछले दस सालों में ग्रिफ के एक जूनियर इंजीनियर, दो आपरेटर और छह स्थानीय मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। करोड़ों की मशीनें भी इन्हीं चट्टानों में दफन हो गईं थी। ग्रिफ के अधिकारियों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान 65 लाख की लागत का डोजर, 2.5 करोड़ रुपये की डीसी 400 ड्रिलिंग मशीन, 40 लाख रुपये की वेगन डील मशीन सहित कई मशीनें नष्ट हो गई थीं। -:: सड़क पर अब तक 408 करोड़ रूपये खर्च ::- पिथौरागढ़। चीन सीमा तक बीआरओ की हीरक परियोजना के तहत निर्मित इस सड़क पर अब तक लगभग 408 करोड़ की धनराशि खर्च हो चुकी है। सड़क कटिंग का काम 2008 से पहले ग्रिफ की 65 आरसीसी ने किया। जून 2008 से 67 आरसीसी ग्रिफ सड़क का काम कर रही है। ग्रिफ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने बताया कि सड़क की कटिंग का काम पूरा हो गया है। अगले दो-तीन वर्षों में सड़क को पक्का कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समय सेना के वाहन इस सड़क में आवागमन करेंगे। शीघ्र ही जनता को भी छोटे वाहनों के संचालन की अनुमति मिल जाएगी। इससे आम जनता को भी सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा।
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