नोटबंदी से सब्जी व्यवसाय गिरा
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नोटबंदी के बाद सब्जी के दामों में गिरावट तो आ गई, साथ ही ग्राहक भी नहीं मिल रहे हैं। आठ नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद सब्जी के व्यवसाय में 50 से 60 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। थोक और रिटेल में खरीदार नहीं मिल रहे हैं। समय पर नहीं बिकने से सब्जी सड़ने लगी है। थोक सब्जी व्यापारियों का कहना है कि फुटकर दुकानों में बिक्री प्रभावित होने से थोक पर असर पड़ा है। फुटकर व्यापारी कम मात्रा में सामान उठा रहे हैं। वजह साफ है कि लोग पैसे की कमी के कारण कम मात्रा में सब्जी खरीद रहे हैं। इस सप्ताह आलू, प्याज और टमाटर के दामों में गिरावट देखी गई। इस समय आलू थोक में आठ रुपए किलो, प्याज 20 रुपए किलो और टमाटर 15 रुपए किलो बिक रहा है।
सब्जी के थोक व्यापारी शकील अहमद ने बताया कि सब्जी की बिक्री में सुधार नहीं आ पाया है, जबकि इस सीजन में आलू, गोभी, मटर की बिक्री काफी तेज रहती थी। उन्होंने बताया कि बिक्री न होने के कारण अधिकांश सब्जियां खराब हो रही हैं। इस कारण दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार की हालत बेहद पस्त है। विवाह के लगन के समय भी सब्जी की बिक्री कम रही। इस महीने विवाह के लगन नहीं हैं। इसका असर भी व्यापार पर पड़ रहा है। पिथौरागढ़ नगर में रोजाना सब्जी के दस ट्रक आते थे। यह सब्जी पीलीभीत और हल्द्वानी मंडी से लाई जाती है। इस समय मात्र पांच ट्रकों में ही सब्जी यहां पहुंच रही है। उसकी भी समय पर बिक्री नहीं हो पा रही है।
स्थानीय सब्जियों का बाजार भी गिरा
इस सीजन में गांवों से लोग पालक, राई, धनिया, मेथी जैसी सब्जियां बाजार में बेचने लाते हैं। गांवों से सब्जी लाने वाले दयाकिशन ने बताया कि लोकल सब्जी की बिक्री भी कम होने लगी है। पहले लोग जाड़ों के सीजन में पर्याप्त मात्रा में सब्जी खरीद लेते थे, लेकिन नोटबंदी के बाद लोकल सब्जी की बिक्री बहुत कम हो गई है।