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बच्चों को विज्ञान विषय पढ़ने के लिए पिथौरागढ़, मुनस्यारी
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जीआईसी मवानी दवानी, बंगापानी।
- फोटो : PITHORAGARH
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। विज्ञान वर्ग में शिक्षक न होने से बंगापानी तहसील क्षेत्र की 15 ग्राम पंचायत के बच्चों को पढ़ाई के लिए पिथौरागढ़ या मुनस्यारी जाना पड़ रहा है।
करीब 90 के दशक में बने जीआईसी मवानी दवानी में विज्ञान विषय की पढ़ाई नहीं हो रही है। वर्ष 2010 से प्रधानाचार्य का पद खाली है। ऐसे में विद्यालय की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। टाटा कंपनी ने जीआईसी भवन का लाखों की लागत से वर्ष 2021 में निर्माण किया था। नया भवन बना लेकिन विज्ञान विषय के शिक्षक न होने के चलते हर साल बच्चे पलायन के लिए मजबूर होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे विज्ञान में रुचि होने के बावजूद कला विषय लेने के लिए मजबूर हैं। इस विद्यालय में 260 बच्चे पढ़ते हैं। लोग लंबे समय से विज्ञान विषय के शिक्षकों और प्रधानाचार्य की तैनाती की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
विज्ञान विषय न होने से 15 ग्राम पंचायतों के बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। विज्ञान पढ़ाई के लिए उन्हें पिथौरागढ़ मुख्यालय जाना पड़ता है। वहां अन्य सुविधाएं भी हैं। - उमेश धामी, प्रधान, मदरमा।
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1990 के दशक में बने इस जीआईसी का भवन सुधारा गया है। विज्ञान शिक्षकों की तैनाती होती तो क्षेत्र से पलायन भी रुकता। प्रधानाचार्य का पद भी खाली पड़ा है। - विजय कमार, क्षेत्र पंचायत सदस्य, मवानी दवानी।
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करीब 90 के दशक में बने जीआईसी मवानी दवानी में विज्ञान विषय की पढ़ाई नहीं हो रही है। वर्ष 2010 से प्रधानाचार्य का पद खाली है। ऐसे में विद्यालय की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। टाटा कंपनी ने जीआईसी भवन का लाखों की लागत से वर्ष 2021 में निर्माण किया था। नया भवन बना लेकिन विज्ञान विषय के शिक्षक न होने के चलते हर साल बच्चे पलायन के लिए मजबूर होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे विज्ञान में रुचि होने के बावजूद कला विषय लेने के लिए मजबूर हैं। इस विद्यालय में 260 बच्चे पढ़ते हैं। लोग लंबे समय से विज्ञान विषय के शिक्षकों और प्रधानाचार्य की तैनाती की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
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विज्ञान विषय न होने से 15 ग्राम पंचायतों के बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। विज्ञान पढ़ाई के लिए उन्हें पिथौरागढ़ मुख्यालय जाना पड़ता है। वहां अन्य सुविधाएं भी हैं। - उमेश धामी, प्रधान, मदरमा।
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1990 के दशक में बने इस जीआईसी का भवन सुधारा गया है। विज्ञान शिक्षकों की तैनाती होती तो क्षेत्र से पलायन भी रुकता। प्रधानाचार्य का पद भी खाली पड़ा है। - विजय कमार, क्षेत्र पंचायत सदस्य, मवानी दवानी।