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भारत-चीन व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार भी असंभव
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No Kailash Yatra in 2021
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पिथौरागढ़। लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच इस वर्ष भी पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन व्यापार शुरू नहीं हो सका। इससे सीमांत की व्यास घाटी के गांवों में सन्नाटा पसरा है। सीमांत के व्यापारी निराश और मायूस हैं।
हर साल एक जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होती थी। यात्रा के साथ ही भारत-चीन व्यापार भी होता था। इससे सीमांत धारचूला की व्यास घाटी में चहल-पहल रहती थी।
केएमवीएन के पर्यटक आवास गृह भी गुलजार रहते थे। कोरोना के कारण वर्ष 2020 में यात्रा संचालित नहीं हो पाई तो भारत-चीन व्यापार भी ठप रहा।
इस बार भी यात्रा और भारत-चीन व्यापार नहीं होगा। इससे सीमांत के व्यापारियों सहित यात्रा और व्यापार से रोजगार पाने वाले लोग काफी निराश हैं।
बूंदी ग्राम पंचायत के बाद सीमांत के गर्ब्यांग और गुंजी आदि गांवों के लोग व्यापार औैर यात्रा शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोरोना के कारण यात्रा शुरू होने का समय बीत चुका है। इस कारण कैलाश यात्रा और व्यापार शुरू होना संभव नहीं है।
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एक जून से 31 अक्तूबर तक चलता है व्यापार
पिथौरागढ़। भारत-चीन व्यापार लिपुलेख में एक जून से 31 अक्तूबर तक चलता है। इसमें सीमांत के व्यापारी गुड़, चीन, मिश्री, सौंदर्य प्रसाधन जड़ी-बूटी आदि सामान लेकर लिपुलेख पहुंचते हैं।
कोरोना के कारण भारत-चीन व्यापार शुरू न होने से सीमांत के व्यापारियों को दिक्कत हो गई है। पोनी संचालकों और पोर्टरों ने भी अब अन्य काम तलाशने शुरू कर दिए हैं।
इस बार यात्रा होती तो वाहन से लिपुलेख पहुंचते कैलाश यात्री
पिथौरागढ़। दो दशकों की प्रतीक्षा के बाद केएमवाई का पैदल मार्ग अब सड़क मार्ग बन चुका है। 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रे तक पहुंचने के लिए पहले कैलाश यात्रियों को 80 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी, जबकि दिल्ली से लिपुलेख पहुंचने में आठ दिन का समय लगता था।
बीआरओ ने अब चीन सीमा के पास स्थित लिपुलेख तक सड़क का निर्माण कर लिया है। पिछले वर्ष 2020 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से घटियाबगड़-लिपुलेख सड़क का उद्घाटन किया था। इस सड़क के बनने से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी सुगम हो गई है।
इस बार यदि यात्रा शुरू होती तो कैलाश यात्री घटियाबगड़ से अति दुर्गम माना जाने वाला 80 किमी का लिपुलेख तक का सफर भी वाहन से पूरा करते। इससे यात्रा के समय में भी कमी आती।
भारत-चीन व्यापार के शुरू न होने से भारत-चीन व्यापार में जाने वाले व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। करोड़ों रुपये का सामान तकलाकोट मंडी में फंसा है। व्यापारियों के हित में यात्रा और व्यापार को शुरू करना चाहिए।।
-दिनेश गुंज्याल, उपाध्यक्ष भारत-चीन व्यापार समिति।
कोरोना के कारण यात्रा इस बार भी शुरू नहीं हो सकी। मानसरोवर यात्री अल्मोड़ा, चौकोड़ी और धारचूला बेस कैंप सहित उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित मार्ग के विभिन्न पड़ावों में स्थित आवास गृहों में रुकते थे। लौटते समय पिथौरागढ़ टीआरसी में विश्राम करते थे। यात्रा न होने से इस बार भी सभी पर्यटक आवास गृहों में सुनसानी रहेगी।
-दिनेश गुरुरानी, साहसिक खेल प्रबंधक कुुमाऊं मंडल विकास निगम।
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हर साल एक जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होती थी। यात्रा के साथ ही भारत-चीन व्यापार भी होता था। इससे सीमांत धारचूला की व्यास घाटी में चहल-पहल रहती थी।
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केएमवीएन के पर्यटक आवास गृह भी गुलजार रहते थे। कोरोना के कारण वर्ष 2020 में यात्रा संचालित नहीं हो पाई तो भारत-चीन व्यापार भी ठप रहा।
इस बार भी यात्रा और भारत-चीन व्यापार नहीं होगा। इससे सीमांत के व्यापारियों सहित यात्रा और व्यापार से रोजगार पाने वाले लोग काफी निराश हैं।
बूंदी ग्राम पंचायत के बाद सीमांत के गर्ब्यांग और गुंजी आदि गांवों के लोग व्यापार औैर यात्रा शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोरोना के कारण यात्रा शुरू होने का समय बीत चुका है। इस कारण कैलाश यात्रा और व्यापार शुरू होना संभव नहीं है।
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एक जून से 31 अक्तूबर तक चलता है व्यापार
पिथौरागढ़। भारत-चीन व्यापार लिपुलेख में एक जून से 31 अक्तूबर तक चलता है। इसमें सीमांत के व्यापारी गुड़, चीन, मिश्री, सौंदर्य प्रसाधन जड़ी-बूटी आदि सामान लेकर लिपुलेख पहुंचते हैं।
कोरोना के कारण भारत-चीन व्यापार शुरू न होने से सीमांत के व्यापारियों को दिक्कत हो गई है। पोनी संचालकों और पोर्टरों ने भी अब अन्य काम तलाशने शुरू कर दिए हैं।
इस बार यात्रा होती तो वाहन से लिपुलेख पहुंचते कैलाश यात्री
पिथौरागढ़। दो दशकों की प्रतीक्षा के बाद केएमवाई का पैदल मार्ग अब सड़क मार्ग बन चुका है। 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रे तक पहुंचने के लिए पहले कैलाश यात्रियों को 80 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी, जबकि दिल्ली से लिपुलेख पहुंचने में आठ दिन का समय लगता था।
बीआरओ ने अब चीन सीमा के पास स्थित लिपुलेख तक सड़क का निर्माण कर लिया है। पिछले वर्ष 2020 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से घटियाबगड़-लिपुलेख सड़क का उद्घाटन किया था। इस सड़क के बनने से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी सुगम हो गई है।
इस बार यदि यात्रा शुरू होती तो कैलाश यात्री घटियाबगड़ से अति दुर्गम माना जाने वाला 80 किमी का लिपुलेख तक का सफर भी वाहन से पूरा करते। इससे यात्रा के समय में भी कमी आती।
भारत-चीन व्यापार के शुरू न होने से भारत-चीन व्यापार में जाने वाले व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। करोड़ों रुपये का सामान तकलाकोट मंडी में फंसा है। व्यापारियों के हित में यात्रा और व्यापार को शुरू करना चाहिए।।
-दिनेश गुंज्याल, उपाध्यक्ष भारत-चीन व्यापार समिति।
कोरोना के कारण यात्रा इस बार भी शुरू नहीं हो सकी। मानसरोवर यात्री अल्मोड़ा, चौकोड़ी और धारचूला बेस कैंप सहित उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित मार्ग के विभिन्न पड़ावों में स्थित आवास गृहों में रुकते थे। लौटते समय पिथौरागढ़ टीआरसी में विश्राम करते थे। यात्रा न होने से इस बार भी सभी पर्यटक आवास गृहों में सुनसानी रहेगी।
-दिनेश गुरुरानी, साहसिक खेल प्रबंधक कुुमाऊं मंडल विकास निगम।