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मजदूरी न मिलने से सब्जी और दाल के लिए तरसे वनराजि परिवार
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कोरोना की दूसरी लहर में उत्तराखंड की एकमात्र आदम जनजाति भी संकट में आ गई है। कोरोना कर्फ्यू के बाद वनराजियों ने सब्जी और मसालों का स्वाद तक नहीं चखा है। मजदूरी से गुजर-बसर करने वाले वनराजि परिवारों की महिलाएं तेल और मसालों के बिना ही खाना बनाने के लिए मजबूर हैं।
कोरोना कर्फ्यू मेें मजदूरी न के बराबर रह गई है। रोज काम कर अपने परिवार के खाने की व्यवस्था करने वाले वनराजि पुरुष कई दिनों से घरों में ही बैठे हैं।
सरकार ने इनके खाने के लिए मुफ्त गेहूं और चावल की व्यवस्था तो कर दी है लेकिन दाल, खाने का तेल, मसाले आदि की व्यवस्था न होने से वनराजि परिवार बेस्वाद खाना खा रहे हैं। कुछ वनराजि परिवार की महिलाएं तो घरेलू दालों में पानी और नमक पकाकर ही बच्चों को खिलाने के लिए मजबूर हो रहीं हैं।
कोरोना कर्फ्यू के कारण पति के पास कोई काम बचा नहीं है। खाने का महंगा तेल, 40 से 50 रुपये किलो आलू, महंगे प्याज खरीदने से परिवार की पहले की बचत भी खत्म हो गई है।
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- पदमा देवी, वनराजि
कोरोना काल में वनराजियों की कमाई के सारे साधन बंद हो गए हैं। मुश्किलों से जीवनयापन कर रहे हैं। बच्चों का पेट भरना भी पहाड़ समान हो गया है।
- कलावती देवी, वनराजि
वनराजियों के परिवारों को मदद की जरूरत है। ग्रामसभा स्तर से जो भी मदद हो रही है, उन तक पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।
- महेंद्र कन्याल, प्रधान
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कोरोना कर्फ्यू मेें मजदूरी न के बराबर रह गई है। रोज काम कर अपने परिवार के खाने की व्यवस्था करने वाले वनराजि पुरुष कई दिनों से घरों में ही बैठे हैं।
सरकार ने इनके खाने के लिए मुफ्त गेहूं और चावल की व्यवस्था तो कर दी है लेकिन दाल, खाने का तेल, मसाले आदि की व्यवस्था न होने से वनराजि परिवार बेस्वाद खाना खा रहे हैं। कुछ वनराजि परिवार की महिलाएं तो घरेलू दालों में पानी और नमक पकाकर ही बच्चों को खिलाने के लिए मजबूर हो रहीं हैं।
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कोरोना कर्फ्यू के कारण पति के पास कोई काम बचा नहीं है। खाने का महंगा तेल, 40 से 50 रुपये किलो आलू, महंगे प्याज खरीदने से परिवार की पहले की बचत भी खत्म हो गई है।
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- पदमा देवी, वनराजि
कोरोना काल में वनराजियों की कमाई के सारे साधन बंद हो गए हैं। मुश्किलों से जीवनयापन कर रहे हैं। बच्चों का पेट भरना भी पहाड़ समान हो गया है।
- कलावती देवी, वनराजि
वनराजियों के परिवारों को मदद की जरूरत है। ग्रामसभा स्तर से जो भी मदद हो रही है, उन तक पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।
- महेंद्र कन्याल, प्रधान