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रामगंगा की सफाई को लेकर कोई चिंतित नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Tue, 21 Mar 2017 10:45 PM IST
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थल के रामगंगा घाट में फैली गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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हाइकोर्ट के आदेश पर इन दिनों पूरे प्रदेश में नदियों को गंदगी और प्रदूषण से मुक्त करने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन थल में रामगंगा की सफाई को लेकर किसी को चिंता नहीं है। रामगंगा, कोकिला और बहुला नदी के संगम पर बने तीन घाटों में होने वाले शवदाह के बाद अधजली लकड़ी, कफन के टुकड़ों, पुराने कपड़ों, राख, कोयले से यह घाट पटे रहते हैं। सारी गंदगी रामगंगा में समाती रहती है। रामगंगा में खास पर्वों पर लोग स्नान भी करते हैं। नदी के किनारे प्राचीन बालेश्वर महादेव का मंदिर है।
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पिछले कुछ समय से देश के विभिन्न हिस्सों में स्पर्श गंगा अभियान, स्वच्छ भारत अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन थल की रामगंगा में ऐसा कोई अभियान अब तक नहीं चल पाया। जिला प्रशासन ने भी अब तक नदियों की सफाई के लिए जितने कार्यक्रम किए, उनमें रामगंगा का नाम कभी शामिल नहीं हुआ। जब नदी गंदगी से पट जाती है तो वर्ष में एक बार कभी स्थानीय व्यापारी कुछ हिस्से पर अपने संसाधनों से सफाई अभियान चलाते हैं। उसके बाद स्थिति वैसी ही हो जाती है।
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इसकी वजह यह है कि थल के रामगंगा घाट पर आसपास के 400 गांवों के लोग शवदाह के लिए पहुंचते हैं। रोजाना कोई न कोई शवदाह यहां पर होता रहता है। जो लोग शवदाह के लिए आते हैं वह सफाई के प्रति कभी ध्यान नहीं देते। हाइकोर्ट की ताजा सख्ती के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन की नजर थल घाट की गंदगी पर भी जरूर पड़ेगी।
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नदी का पानी उपयोग लायक नहीं बचेगा
बालेश्वर मंदिर के पुजारी गणेश दत्त भट्ट का कहना है कि घाट की सफाई के लिए अब स्थायी व्यवस्था किया जाना बेहद जरूरी हो गया है। यदि नदी में इसी तरह गंदगी फैलती रही तो आने वाले समय में नदी का पानी उपयोग के लायक नहीं बचेगा। वह कहते हैं कि प्रशासन ने कभी भी इस नदी को सफाई के लिए अपने एजेंडे में शामिल ही नहीं किया।
नदी में गंदगी न जाए, ऐसी व्यवस्था हो
बालेश्वर मंदिर के बुजुर्ग पुजारी मथुरादत्त भट्ट का कहना है कि रामगंगा का पानी मंदिर में भी चढ़ाया जाता है। नदी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। अब रामगंगा की सफाई के लिए बड़ा अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि गंदगी दूर हो जाए और शवदाह के लिए ऐसी व्यवस्था की जाए कि नदी में गंदगी न जाने पाए।