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Pithoragarh News: 27 परिवारों के लिए 10 साल से गरारी बनी जीवन रेखा
Mon, 16 Oct 2023 10:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 16 Oct 2023 10:30 AM IST
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बंगापानी के गोरी नदी में गरारी से घरुड़ी जाती महिलाएं। संवाद
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील के ग्राम पंचायत मवानी दवानी के घरुड़ी गांव के 27 परिवार एक दशक से जान जोखिम में डालकर गरारी से आवाजाही कर रहे हैं। किसी के बीमार होने या प्रसव पीड़िता को अस्पताल पहुंचाना यहां के लोगों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है।
वर्ष 2013 की आपदा में गोरी नदी पर लुम्ती-घरुड़ी को जोड़ने के लिए बना पुल बह गया था। इसके बाद 2018 में पुल निर्माण की कार्यवाही शुरू हुई लेकिन आपदा काल में निर्माणाधीन पुल भी नदी में समा गया। तब से लोग गरारी के सहारे ही गोरी नदी को पार करते हैं। बीमार हो या बच्चे गरारी ही उनके लिए दुनिया से जुड़ने का एकमात्र सहारा है। क्षेत्र के लोगों पर हर साल आपदा की मार पड़ती है।
जुलाई 2020 की आपदा में बारिश से गोरी नदी में आई बाढ़ से लुम्ती-घरुड़ी में बनी गरारी बह गई थी। इसके बाद लोगों ने लकड़ी का कच्चा पुल बनाकर आवाजाही की व्यवस्था की। कुछ समय बाद प्रशासन के निर्देश पर लोनिवि ने गरारी बनाई। इसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली है। उफनाती नदी को गरारी से पार करना खतरे से खाली नहीं होता। मवानी दवानी की प्रधान मुन्नी देवी का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द गोरी नदी पुल बनाना चाहिए।
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घरुड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए गरारी ही आवाजाही का सहारा है। अगर गरारी नहीं होती तो उनका शेष दुनिया से संपर्क कट जाता। बारिश के दौरान तो काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। - भीम सिंह वर्ती, घरुड़ी।
गोरी नदी पर पुल बन जाता तो बड़ी राहत मिलती। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल होता है। राशन हो याह घर का कोई भी जरूरी सामान उसे घर तक लाने के लिए गरारी से नदी पार कर लाया जाता है। - गंभीर सिंह सामंत, स्थानीय।
वर्ष 2013 से घरुड़ी के लोग आपदा की मार झेल रहे हैं। गांव से बच्चे, बूढ़े, महिलाएं, विद्यार्थी गरारी के सहारे बंगापानी पहुंचते हैं। खाद्यान्न के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। पुल निर्माण के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। -हरिचंद, सरपंच, घरुड़ी।
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वर्ष 2013 की आपदा में गोरी नदी पर लुम्ती-घरुड़ी को जोड़ने के लिए बना पुल बह गया था। इसके बाद 2018 में पुल निर्माण की कार्यवाही शुरू हुई लेकिन आपदा काल में निर्माणाधीन पुल भी नदी में समा गया। तब से लोग गरारी के सहारे ही गोरी नदी को पार करते हैं। बीमार हो या बच्चे गरारी ही उनके लिए दुनिया से जुड़ने का एकमात्र सहारा है। क्षेत्र के लोगों पर हर साल आपदा की मार पड़ती है।
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जुलाई 2020 की आपदा में बारिश से गोरी नदी में आई बाढ़ से लुम्ती-घरुड़ी में बनी गरारी बह गई थी। इसके बाद लोगों ने लकड़ी का कच्चा पुल बनाकर आवाजाही की व्यवस्था की। कुछ समय बाद प्रशासन के निर्देश पर लोनिवि ने गरारी बनाई। इसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली है। उफनाती नदी को गरारी से पार करना खतरे से खाली नहीं होता। मवानी दवानी की प्रधान मुन्नी देवी का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द गोरी नदी पुल बनाना चाहिए।
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घरुड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए गरारी ही आवाजाही का सहारा है। अगर गरारी नहीं होती तो उनका शेष दुनिया से संपर्क कट जाता। बारिश के दौरान तो काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। - भीम सिंह वर्ती, घरुड़ी।
गोरी नदी पर पुल बन जाता तो बड़ी राहत मिलती। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल होता है। राशन हो याह घर का कोई भी जरूरी सामान उसे घर तक लाने के लिए गरारी से नदी पार कर लाया जाता है। - गंभीर सिंह सामंत, स्थानीय।
वर्ष 2013 से घरुड़ी के लोग आपदा की मार झेल रहे हैं। गांव से बच्चे, बूढ़े, महिलाएं, विद्यार्थी गरारी के सहारे बंगापानी पहुंचते हैं। खाद्यान्न के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। पुल निर्माण के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। -हरिचंद, सरपंच, घरुड़ी।