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नेपाल के त्रिपुरासुंदरी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
ब्यूरो/अमर उजाला, बैतड़ी/झूलाघाट
Updated Sat, 28 Oct 2017 10:32 PM IST
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नेपाल के त्रिपुरासुंदरी मेले में उमड़ा भक्तों का सैलाब
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल के बैतड़ी जिले के प्रसिद्ध त्रिपुरासुंदरी मेले में शनिवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नेपाल पुलिस ने पुख्ता प्रबंध किए थे। मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। त्रिपुरासुंदरी मंदिर में 75 भैंसों और 150 बकरियों की बलि दी गई। मेले को देखने के लिए नेपाल और भारत से काफी लोग जुटे।
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मेले में पहले दिन शुक्रवार की शाम मां भगवती का डोला मंदिर परिसर में बने भंडारगृह से मंदिर में लाया गया। रात्रि में हजारों लोगों ने हाथ में जलते दीये लेकर अपनी मनोकामना के लिए जागरण किया और भक्तों ने परिवार में सुख शांति के लिए हवन यज्ञ किया। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज भट्ट बताया इस वर्ष 18 स्थानों पर हवन हुए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हवन कम होने के कारण देवी की डोला यात्रा जल्दी शुरू हो गई थी। शनिवार को मां भगवती का डोला ध्वज पताका, ढोल नगाड़ा, त्रिशूल, सोने और चांदी की छड़ों के साथ 2 किमी दूर देवी के मायके कापड़ीगांव तक ले जाया गया।
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वापसी में मां भगवती की सवारी लेकर आने वाले लोग रास्ते से चमड़े के सामान पहने लोगों को हटाते हुए रास्ते के दोनों और धूप जलाकर वातावरण को सुगंधित करते हुए आगे बढ़ते हैं। डोले के आगे नर्तकियां नृत्य करते हुए चलती हैं। डोले के साथ बहुत संख्या में देव कन्याएं चंवर हिलाते हुए चलती हैं। लौटने के बाद मंदिर में मां भगवती का शृंगार होता है। फिर मां का आशीर्वाद देने के लिए माता के देवडांगर ऊंचे स्थान पर जाकर लोगों पर फूल और अक्षत फेंकते हैं। उसके बाद मंदिर के सभी छोरों में पूजा-अर्चना के बाद मां भगवती को दोबारा एक वर्ष के लिए गर्भगृह में रख दिया जाता है। उसके बाद भैंसों और बकरियों की बलि शुरू हो जाती है।
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इस वर्ष भारत से नेपाल की ओर पशुओं के ले जाने में प्रतिबंध और नजदीक के गांव में अशुद्धि होने के कारण 75 भैसों और 150 बकरियों की ही बलि हो पाई। पिछले साल यह संख्या इससे दोगुना थी। मेले में नेपाल के डीआईजी विजय राज भट्ट, बैतड़ी के डीएसपी हेरंब शर्मा कटेल की मौजूदगी में भारी संख्या में नेपाल पुलिस और सशस्त्र प्रहरी के जवान मौजूद थे। मेले में प्रकाश थापा के नेतृत्व में सैकड़ों स्वयंसेवक लोगों की मदद कर रहे थे। मेले में हर साल की भांति लोगों द्वारा दिए गए चढ़ावे को रजिस्टर (अटक) में अंकित किया गया। इसके लिए मेला समिति ने पद्म चंद को जिम्मेदारी दे रखी थी।
बैतड़ी पुलिस के अनुसार मेले में 1 लाख 50 हजार लोग पहुंचे। मेले को देखते हुए बैतड़ी के टैक्सी यूनियन ने जूलाघाट से अतिरिक्त टैक्सी लगाने के बावजूद कई लोगों को पैदल 6 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़कर मेले में जाना पड़ा। मेले की कवरेज करने के लिए नेपाल टेलीविजन, कांतिपुर टेलीविजन और भारत के कई मीडिया कर्मी आए थे। मेले में पूजा करने के लिए महेंद्रनगर के सांसद महेंद्र थापा, बैतड़ी के सांसद नर बहादुर चंद, महेंद्रनगर लायंस क्लब के हरीश थापा और युवक मंगल दल झूलाघाट के अध्यक्ष डब्बू गड़कोटी आदि लोग आए थे।
मेले पर जीएसटी का असर दिखा
भारत में केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी लगाने का प्रभाव नेपाल के बैतड़ी जिले के त्रिपुरासुंदरी मेले में भी देखने को मिला। मेले में जितनी भी दुकानें लगी थी, उनमें सभी तरह का सामान 15 से 20 रुपये तक महंगा मिल रहा था। भारत के बड़े शहरों से आए व्यापारियों के पास सामान के बिल न होने के कारण वे मेले में नहीं आ पाए। कुछ व्यापारियों ने स्थानीय बाजार से सामान खरीदकर दुकानें लगाई। बैतड़ी के व्यापारियों को भी इस बार टैक्स देकर सामान पहुंचाना पड़ा। मथुरा के मिठाई व्यापारी ओम प्रकाश एवं कन्हैया लाल ने बताया कि चीनी और मैदा पिछले साल की अपेक्षा 20 रुपये किलो तक महंगा मिला। इसीलिए मिठाई पिछले साल 180 रुपये किलो बिकी थी, इस साल यह 200 रुपये किलो तक पहुंच गई।