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राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होने से नंदा रावत खुश

Fri, 26 Aug 2016 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 26 Aug 2016 10:20 PM IST
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Nanda Rawat happy to be selected for the President's Award
जीजीआईसी की प्रधानाचार्य नंदा रावत - फोटो : अमर उजाला

गंगोत्री गर्ब्याल राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य नंदा रावत को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होने की सूचना सबसे पहले अमर उजाला से मिली। वह पुरस्कार के लिए चयनित होने से खुश हैं। कहती हैं कि इस बार पुरस्कार के लिए वास्तव में सही मूल्यांकन हुआ है।

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मूल रूप से मुनस्यारी के सरमोली गांव निवासी नंदा रावत की प्रथम नियुक्ति जीजीआईसी धारचूला में 1986 में हुई। वह वहां पर केमिस्ट्री प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रही। उसके बाद उनकी तैनाती राजकीय कन्या इंटर कॉलेज थल में प्रधानाचार्य के पद हुई। उन्होंने पांच साल तक थल में प्रधानाचार्य रहते हुए विद्यालय की दशा सुधार दी। वर्ष 2011 से वह गंगोत्री गर्ब्याल राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। इस विद्यालय की अतीतकाल से ही ख्याति रही है। महान शिक्षाविद गंगोत्री गर्ब्याल ने कई वर्षों तक इस शिक्षण संस्थान में प्रधानाचार्य का पद संभाला और कई बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। आज गंगोत्री के उन आदर्शों को नंदा रावत ने अपने कठोर अनुशासन के बल पर सींचने और स्थापित करने का प्रयास किया है। इसी वजह से इस बार इस विद्यालय को आदर्श का दर्जा मिला है। नंदा कहती हैं कि राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है।
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देशभर से आवेदन आते हैं। अपने काम का प्रस्तुतीकरण चयन टीम के सामने करना पड़ता है। वह बताती हैं कि जब वह प्रवक्ता के तौर पर कार्यरत रहीं तब उनके विषय का रिजल्ट हमेशा सौ फीसदी रहा। शिक्षा के प्रति समर्पित नंदा ने जीजीआईसी को उच्च मुकाम दिलाने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा है। वह कहती हैं कि बालिकाओं का समग्र विकास होना चाहिए। उनको शिक्षा के साथ साथ खेल, संगीत, एनसीसी, एनएसएस जैसी गतिविधियों में शामिल करना जरूरी है। यह सारे काम वह अपने विद्यालय में लगातार कर रही हैं। नंदा ने बताया कि पिछले साल उनके विद्यालय को प्रदेश सरकार की ओर से पर्यावरण संरक्षण के लिए दिया जाने वाला तरुश्री पुरस्कार मिल चुका है। खुद को मिले राष्ट्रपति पुरस्कार को वह निष्ठा और बेहतर काम के लिए मिला पुरस्कार बताती हैं। 

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