फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand First Thales garden will open in munsiyari with 391 species

उत्तराखंड: मुनस्यारी के थैलस गार्डन में एक साथ दिखेंगी लाइकेन की 391 प्रजातियां

Mon, 14 Sep 2020 07:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Mon, 14 Sep 2020 07:02 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand First Thales garden will open in munsiyari with 391 species
थैलस गार्डन - फोटो : अमर उजाला

वन विभाग मुनस्यारी के पातलथौड़ में थैलस गार्डन बना रहा है। इस गार्डन में काई (लाइकेन) की 391 प्रजातियां देखने को मिलेंगी। पिथौरागढ़ वन प्रभाग की ओर से स्थापित मुनस्यारी नेचर एजुकेशन एवं इको पार्क सेंटर के सहयोग से बन रहा यह गार्डन देश का पहला गार्डन होगा जो शोधकर्ताओं, जिज्ञासुओं और छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगा।

विज्ञापन


हाल ही में नौ हजार फीट की ऊंचाई पर ट्यूलिप गार्डन तैयार करने के बाद वन विभाग मुनस्यारी में थैलस गार्डन विकसित कर रहा है। इस गार्डन में तमाम तरह के शैवाल, ब्रायोफाइट्स और कवक नजर आएंगे। पिथौरागढ़ जिले में सूक्ष्म पादप में लाइकेन की 391 प्रजातियां, ब्रायोफाइट्स की 226 और कवकों की 49 प्रजातियां पाई जाती हैं।
विज्ञापन


इनमें से लगभग 60 प्रतिशत प्रजातियां ऐसी हैं जो मुनस्यारी में पाई जाती हैं। मुनस्यारी के खलियाटॉप ट्रैक में लाइकेन की एक सौ से अधिक प्रजातियां हैं। लाइकेन का यह बगीचा पर्यावरण प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लाइकेन को माना जाता है जुरासिक युग का पौधा 
थैलस का अर्थ एक सूक्ष्म हरी शाक, जिनमें जड़, तना, पत्ती की संरचनाएं नहीं पाई जाती हैं। थैलस पादप मुख्य रूप से शैवाल, कवक और हरितोद्भिद लाइकेन जैसे झुला घास आदि के सूक्ष्म पादप के समूह से बनते हैं। ये थैलस पादप वनस्पति जगत में सबसे निचले वर्ग में आते हैं। यह नम स्थानों पर होता है। थैलस पादपों के समूह में लाइकेन को जुरासिक युग (लिविंग फॉसिल) का माना जाता है। 

पारिस्थितिकी तंत्र में है महत्वपूर्ण योगदान

पारिस्थितिकी तंत्र एवं पर्यावरण संतुलन में इन सूक्ष्म पादपों का बड़ा योगदान माना जाता है। लाइकेन समूह जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और वायु प्रदूषण के संकेतक के रूप में जाने जाते हैं। ग्रीन हाउस गैसों के संतुलन में भी इन पादपों का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। 

एंटीबायोटिक दवाएं और मसालों में होता है प्रयोग
पिथौरागढ़। थैलस पादपों का उपयोग एंटीबायोटिक दवाएं, मसाले, नेचुरल डाई आदि उत्पादों को बनाने में होता है। इन्हें प्राकृतिक एंटीबायोटिक भी कहा जाता है। 

थैलस पादपों से संबंधित जानकारी एवं संरक्षण के महत्व को देखते हुए मुनस्यारी के पातलथौड़ में 10 हेक्टेअर में गार्डन विकसित किया जा रहा है। यह शोधार्थियों , जिज्ञासुओं और विद्यार्थियों के लिए लाभकारी साबित होगा। 
- विनय भार्गव, डीएफओ पिथौरागढ़।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed