पहाड़ पर गहराया पेयजल संकट
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गर्मी बढ़ने के साथ ही जिला मुख्यालय समेत कई इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी सप्लाई की स्थिति सामान्य है और वितरण की व्यवस्था पर बराबर नजर रखी जा रही है। इस बीच नगर के घंटाकरण, खड़कोट, सेरा, लुंठ्यूड़ा में संकट गहराने से लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि कुछ हिस्सों में पानी की सप्लाई ठीक हो रही है, लेकिन कुछ इलाकों में नाममात्र का पानी दिया जा रहा है। ठुलीगाड़ पंपिंग योजना में पानी लगातार कम हो रहा है। इस कारण घाट पंपिंग योजना पर निर्भरता बढ़ गई है।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा ने कहा कि पेयजल सप्लाई को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिन इलाकों में किल्लत हो रही है वहां का खुद दौरा करेंगे और जूनियर इंजीनियरों की टीम को भेजा जाएगा। इधर, जिला मुख्यालय में पानी तो रोज मिल रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि पानी इतना कम आ रहा है कि उससे अगले 24 घंटे तक काम चला पाना संभव नहीं हो रहा है।
उधर, बेड़ीनाग में 15 हजार की आबादी के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बेड़ीनाग नगर से सटे भटीगांव, ढनौली, सांगड़, खितोली, बना गांवों में प्राकृतिक स्रोत सूखने लगे हैं। लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। जल संस्थान के अवर अभियंता गजेंद्र सिंह ने कहा कि समस्या बढ़ रही है। विभाग टैंकरों से पानी का वितरण कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में टैंकरों से पानी का वितरण संभव नहीं है।
इस बार गांवों में भी लोग परेशान
कनालीछीना। पिछले साल मानसून की बारिश सामान्य से कम होने और शीतकाल में नाममात्र की बारिश होने से ग्रामीण अंचलों में प्राकृतिक स्रोत न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। गाड़, गधेरों का पानी भी सूखने लगा है। पहले ऐसी नौबत मई में प्रचंड गर्मी के समय आती थी, लेकिन इस बार मार्च से ही समस्या खड़ी होने लगी है। लोगों के सामने जानवरों के लिए पानी का इंतजाम करने में ज्यादा कठिनाई हो रही है।