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काली नदी में दो नए झूला पुलों का निर्माण करेगा नेपाल
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भारत-नेपाल को जोड़ने वाला द्वालीसेरा में बना झूलापुल। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। दार्चुला और पिथौरागढ़ जिले को जोड़ने के लिए नेपाल काली नदी पर दो नए पुलों का निर्माण कर रहा है। इन पुलों के बनने से भारत-नेपाल के बीच आवाजाही और सुगम हो जाएगी। इससे रोटी-बेटी के रिश्तों में भी मजबूती आएगी।
इस समय पिथौरागढ़ जिले में भारत-नेपाल को जोड़ने वाले आठ पुल हैं। इनमें सीतापुल, धारचूला, बलुवाकोट, जौलजीबी, डौड़ा, झूलाघाट, एलागाड़, द्वालीसेरा शामिल हैं। इनमें से एलागाड़ और द्वालीसेरा पुलों का निर्माण पिछले वर्ष नेपाल ने किया था और हाल ही में इन पुलों का संचालन शुरू हुआ है। अब नेपाल माल और मलघाट नामक स्थानों पर दो और नए पुलों का निर्माण कर रहा है। माल में बन रहा पुल भारत में पांगला को जोड़ेगा। दूसरा पुल नेपाल के मलघाट में बनेगा यह पुल भारत में गस्कू गांव को नेपाल से जोड़ेगा। नेपाल ने इन पुलों पर काम शुरू कर दिया है। इन दो पुलों के बनने से अधिक फायदा नेपाल के नागरिकों को होगा।
सीमांत गांवों में रहने वाले लोग एक-दूसरे देशों में वैवाहिक रिश्ते बनाते हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते होने के कारण दोनों देशों के बीच लगातार आवाजाही बनी रहती है। पहले भारत और नेपाल को जोड़ने के लिए पुलों की संख्या सीमित होने से लोगों को 10 से 12 किमी की दूरी तय कर आवाजाही करनी पड़ती थी। जौलजीबी और झूलाघाट के बीच लगभग 30 किमी तक कोई पुल न होने से तीतरी, द्वालीसेरा, पीपली, डौड़ा, चकद्वारी आदि गांवों के लोगों को काली पार अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए या तो मीलों का दोहरा फेरा लगाना पड़ता था। इसी तरह से धारचूला से कालापानी के बीच केवल एकमात्र सीतापुल होने से 50 से अधिक किमी की दूरी तय करनी पड़ती थी। नेपाल के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर है। ऐसे में कई बार नेपाली तार या ट्यूब के सहारे भारत के लिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। पुलों के बनने से लोगों को अब अधिक दूरी तय करने या फिर जान जोखिम में डालकर आने-जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेेगा। नेपाल जिला प्रशासन के अनुसार माल और मलघाट में झूलापुलों का निर्माण शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।
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इस समय पिथौरागढ़ जिले में भारत-नेपाल को जोड़ने वाले आठ पुल हैं। इनमें सीतापुल, धारचूला, बलुवाकोट, जौलजीबी, डौड़ा, झूलाघाट, एलागाड़, द्वालीसेरा शामिल हैं। इनमें से एलागाड़ और द्वालीसेरा पुलों का निर्माण पिछले वर्ष नेपाल ने किया था और हाल ही में इन पुलों का संचालन शुरू हुआ है। अब नेपाल माल और मलघाट नामक स्थानों पर दो और नए पुलों का निर्माण कर रहा है। माल में बन रहा पुल भारत में पांगला को जोड़ेगा। दूसरा पुल नेपाल के मलघाट में बनेगा यह पुल भारत में गस्कू गांव को नेपाल से जोड़ेगा। नेपाल ने इन पुलों पर काम शुरू कर दिया है। इन दो पुलों के बनने से अधिक फायदा नेपाल के नागरिकों को होगा।
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सीमांत गांवों में रहने वाले लोग एक-दूसरे देशों में वैवाहिक रिश्ते बनाते हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते होने के कारण दोनों देशों के बीच लगातार आवाजाही बनी रहती है। पहले भारत और नेपाल को जोड़ने के लिए पुलों की संख्या सीमित होने से लोगों को 10 से 12 किमी की दूरी तय कर आवाजाही करनी पड़ती थी। जौलजीबी और झूलाघाट के बीच लगभग 30 किमी तक कोई पुल न होने से तीतरी, द्वालीसेरा, पीपली, डौड़ा, चकद्वारी आदि गांवों के लोगों को काली पार अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए या तो मीलों का दोहरा फेरा लगाना पड़ता था। इसी तरह से धारचूला से कालापानी के बीच केवल एकमात्र सीतापुल होने से 50 से अधिक किमी की दूरी तय करनी पड़ती थी। नेपाल के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर है। ऐसे में कई बार नेपाली तार या ट्यूब के सहारे भारत के लिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। पुलों के बनने से लोगों को अब अधिक दूरी तय करने या फिर जान जोखिम में डालकर आने-जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेेगा। नेपाल जिला प्रशासन के अनुसार माल और मलघाट में झूलापुलों का निर्माण शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।
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