फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Monsoon season nears, 200 danger zones on Pithoragarh roads will test patience

Pithoragarh News: मानसूनकाल नजदीक, पिथौरागढ़ की सड़कों पर 200 डेंजर जोन लेंगे सब्र की परीक्षा

Wed, 03 Jun 2026 10:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Wed, 03 Jun 2026 10:37 PM IST
विज्ञापन
Monsoon season nears, 200 danger zones on Pithoragarh roads will test patience
पिथौरागढ़। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील सीमांत जिले की सड़कों पर खतरा कम करने के दावे परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं। सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही के दावे कर सुरक्षात्मक कार्य में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी डेंजर जोन की संख्या कम नहीं हो पा रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिस्टम एक साल में सड़कों पर बने सिर्फ 85 डेंजर जोनों का ही ट्रीटमेंट कर सका है। अब भी 200 डेंजर जोन सड़कों पर खतरा बने हुए हैं जो मानसूनकाल में दिक्कत बढ़ाएंगे।
विज्ञापन




जिले की छह लाख से अधिक की आबादी की आवाजाही के लिए एनएच, एसएच सहित 350 से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया है। इन सड़कों पर पिछले आपदाकाल में 285 डेंजर जोन चिह्नित किए गए थे। हर मानसूनकाल में इन डेंजर जोन पर पहाड़ी दरकने, मलबा और बोल्डर गिरने से सड़कों पर आवाजाही बंद रहती है। इस कारण क्षेत्र के लोग, वाहन चालक और पर्यटक मुसीबत झेलते हैं।
विज्ञापन


बीमारों और गर्भवतियों को भी समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बनता है। हैरानी है कि करोड़ों का बजट सुरक्षा के नाम पर खर्च हो रहा है लेकिन अब तक यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी डेंजर जोन का ट्रीटमेंट करने में सिस्टम नाकाम साबित हुआ है। जल्द ही मानसूनकाल शुरू होने वाला है और एक बार फिर डेंजर जोन सीमांत के लोगों के सब्र की परीक्षा लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन




--

थल-मुनस्यारी सड़क पर हैं खतरनाक डेंजर जोन



सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण थल-मुनस्यारी सड़क पर हरड़िया और रातीगाड़ की पहाड़ी हर मानसूनकाल में मुसीबत का सबब बनती है। वर्ष 2023 की आपदा में इन दोनों स्थानों पर पहाड़ी दरकने से 15 दिन से अधिक समय तक आवाजाही ठप रही थी। इन दोनों डेंजर जोन के ट्रीटमेंट के लिए प्रस्ताव तैयार कर औपचारिकता निभा दी गई। वहीं इस सड़क पर नागीमल की पहाड़ी का भी अब तक ट्रीटमेंट नहीं हो सका है।

--



टनकपुर-लिपुलेख हाईवे पर हर साल मुसीबत खड़ी होती है

टनकपुर-लिपुलेख हाईवे सीमांत जिले की लाइफलाइन है। घाट से लेकर लिपुलेख तक इस हाईवे पर घाट बैंड, चुपकोट, दिल्ली बैंड, लखनपुर, तवाघाट सहित अन्य स्थानों पर 25 से अधिक डेंजर जोन हैं। अब तक इनका ट्रीटमेंट नहीं हो सका है। एनएच और बीआरओ के अधीन इन सड़कों पर बने डेंजर जोन हर साल मुसीबत खड़ी करते हैं। डेंजर जोन पर पहाड़ी दरकने से मैदानी क्षेत्रों से सप्लाई बंद हो जाती है और लोगों की आवाजाही भी। इसके बाद भी अब तक इन डेंजर जोन का ट्रीटमेंट न होना सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।



--

डेंजर जोन पर जेसीबी मशीन रहेंगी तैनात



मानसूनकाल नजदीक आते ही प्रशासन ने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। भले ही डेंजर जोन का ट्रीटमेंट नहीं हो सका हो लेकिन मानसूनकाल में सड़कों पर आवाजाही सुचारु रखने के लिए जेसीबी मशीन तैनात करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। जल्द ही प्रशासन चिह्नित डेंजर जोन और इसके आसपास जेसीबी मशीन तैनात करेगा जिसके लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सड़कों पर खतरे वाले स्थानों पर यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम भी होंगे।


कोट



मानसूनकाल से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। मानसूनकाल में सड़कों पर यात्रियों की सुरक्षा के साथ आवाजाही सुचारु रखना प्राथमिकता है। इसके लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। बंद सड़कों को शीघ्र खोलने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। आपदाकाल में संचार सेवा को दुरुस्त रखने के भी संबंधित कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। - आशीष कुमार भटगाईं, डीएम, पिथौरागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed