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एक ऐसा सरकारी स्कूल जहां हर शनिवार को लगती है मस्ती की पाठशाला
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नेपाल सीमा से लगे आदर्श प्राथमिक विद्यालय में नवाचारी गतिविधि करते बच्चे। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। जहां एक ओर अभिभावक बच्चों को सरकारी स्कूलों के बजाय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं वहीं कई अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों का प्रवेश सीमांत के सबसे दुर्गम आदर्श प्राथमिक विद्यालय जाजरचिंगरी में करा रहे हैं। विद्यालय में हर शनिवार को बच्चों के लिए मस्ती की पाठशाला का आयोजन किया जाता है। इस दिन बच्चे विद्यालय बिना बस्ते के आते हैं। यहां बच्चों को प्रेरणादायक फिल्म दिखाने के साथ ही मशरूम उत्पादन, झाड़ूू निर्माण आदि रोजगारपरक शिक्षा दी जा रही है।
जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर आदर्श प्राथमिक विद्यालय जाजरचिंगरी में वर्ष 2017 में छात्र संख्या 45 थी जो अब बढ़कर 63 हो गई है। इस विद्यालय में नेपाल सीमा से लगे नौ गांवों के बच्चे आते हैं। प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर जोशी ने वहां वर्ष 2017 में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने वहां नवाचारी कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया।
वहां बच्चों को पढ़ाई के साथ मशरूम उत्पादन, अचार बनाना सिखाया जा रहा है। विद्यालय में उगाए गए मशरूम का प्रयोग मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में किया जाता है जिससे एमडीएम की पौष्टिकता बढ़ जाती है। वहां हर शनिवार को मस्ती की पाठशाला होती है। इसमें खेल सहित कई प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। लोगों ने प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर के नवाचारी प्रयोगों की सराहना की है। लोगों का कहना है कि नए नवाचारी प्रयोगों के कारण आज प्राथमिक विद्यालय निजी विद्यालयों को मात दे रहा है। संवाद
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आदर्श प्राथमिक विद्यालय में भी शिक्षकों की कमी
पिथौरागढ़। आदर्श प्राथमिक विद्यालय में पांच शिक्षक होने चाहिए लेकिन जाजरचिंगरी का आदर्श प्राइमरी स्कूल एक मात्र प्रधानाध्यापक के सहारे संचालित है। वहां कोई सहायक अध्यापक नहीं है। स्थानीय लोगों ने इस विद्यालय में खाली पद भरने की मांग की है।
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जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर आदर्श प्राथमिक विद्यालय जाजरचिंगरी में वर्ष 2017 में छात्र संख्या 45 थी जो अब बढ़कर 63 हो गई है। इस विद्यालय में नेपाल सीमा से लगे नौ गांवों के बच्चे आते हैं। प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर जोशी ने वहां वर्ष 2017 में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने वहां नवाचारी कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया।
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वहां बच्चों को पढ़ाई के साथ मशरूम उत्पादन, अचार बनाना सिखाया जा रहा है। विद्यालय में उगाए गए मशरूम का प्रयोग मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में किया जाता है जिससे एमडीएम की पौष्टिकता बढ़ जाती है। वहां हर शनिवार को मस्ती की पाठशाला होती है। इसमें खेल सहित कई प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। लोगों ने प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर के नवाचारी प्रयोगों की सराहना की है। लोगों का कहना है कि नए नवाचारी प्रयोगों के कारण आज प्राथमिक विद्यालय निजी विद्यालयों को मात दे रहा है। संवाद
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आदर्श प्राथमिक विद्यालय में भी शिक्षकों की कमी
पिथौरागढ़। आदर्श प्राथमिक विद्यालय में पांच शिक्षक होने चाहिए लेकिन जाजरचिंगरी का आदर्श प्राइमरी स्कूल एक मात्र प्रधानाध्यापक के सहारे संचालित है। वहां कोई सहायक अध्यापक नहीं है। स्थानीय लोगों ने इस विद्यालय में खाली पद भरने की मांग की है।