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Pithoragarh News: मेघनाद ने शक्ति बाण से लक्ष्मण को किया मूर्छित
Tue, 03 Nov 2026 11:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 03 Nov 2026 11:27 PM IST
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। मदकोट कस्बे में आयोजित रामलीला के 10वें दिन काफी संख्या में दर्शक पहुंचे। यहां लंका में अंगद के संवाद और शक्ति बाण लगने से मूर्छित हुए लक्ष्मण के चेतना में लौटने तक के प्रमुख प्रसंगों का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
लीला मंचन में दिखाया गया कि लंका पहुंचकर अंगद ने नीति और धर्म के मार्ग पर चलते हुए रावण को समझाने का भरसक प्रयास किया। उन्होंने रावण को उनके पिता बाली के साथ उसकी पुरानी मित्रता की भी याद दिलाई लेकिन अहंकारी रावण पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद अंगद ने अपना पैर धरती पर मजबूती से जमाया और रावण की सभा के बलशाली राक्षसों को चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे उनका पैर उठाकर दिखाएं। लाख कोशिशों के बावजूद कोई भी राक्षस अंगद का पैर हिला तक नहीं पाया।
इसके पश्चात युद्ध की भीषण तैयारियां शुरू हुईं। मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच हुए भयंकर युद्ध में मेघनाथ के छोड़े गए शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। लक्ष्मण की यह दशा देख प्रभु श्रीराम विलाप करने लगे। संकट की इस घड़ी में हनुमान जी तुरंत वैद्य सुषेण को बुलाकर लाए।
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सुषेण वैद्य के परामर्श पर हनुमान जी ने द्रोणगिरि पर्वत से जाकर संजीवनी बूटी प्राप्त की। संजीवनी बूटी के सेवन से लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर हो गई और वे पूरी तरह सचेत हो गए। लक्ष्मण के पुनः स्वस्थ होने की इस पावन घटना पर पूरा पंडाल भगवान राम के जयघोष से गूंज उठा।
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लीला मंचन में दिखाया गया कि लंका पहुंचकर अंगद ने नीति और धर्म के मार्ग पर चलते हुए रावण को समझाने का भरसक प्रयास किया। उन्होंने रावण को उनके पिता बाली के साथ उसकी पुरानी मित्रता की भी याद दिलाई लेकिन अहंकारी रावण पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद अंगद ने अपना पैर धरती पर मजबूती से जमाया और रावण की सभा के बलशाली राक्षसों को चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे उनका पैर उठाकर दिखाएं। लाख कोशिशों के बावजूद कोई भी राक्षस अंगद का पैर हिला तक नहीं पाया।
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इसके पश्चात युद्ध की भीषण तैयारियां शुरू हुईं। मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच हुए भयंकर युद्ध में मेघनाथ के छोड़े गए शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। लक्ष्मण की यह दशा देख प्रभु श्रीराम विलाप करने लगे। संकट की इस घड़ी में हनुमान जी तुरंत वैद्य सुषेण को बुलाकर लाए।
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सुषेण वैद्य के परामर्श पर हनुमान जी ने द्रोणगिरि पर्वत से जाकर संजीवनी बूटी प्राप्त की। संजीवनी बूटी के सेवन से लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर हो गई और वे पूरी तरह सचेत हो गए। लक्ष्मण के पुनः स्वस्थ होने की इस पावन घटना पर पूरा पंडाल भगवान राम के जयघोष से गूंज उठा।