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Pithoragarh News: पीठ पर सामान, राहें नहीं आसान... ड्यूटी से पहले पहाड़ नापने की परीक्षा
Tue, 22 Jul 2025 10:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 22 Jul 2025 10:45 PM IST
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धारचूला विकासखंड के सबसे दूरस्थ मतदान केंद्र कनार के लिए रवाना होती पोलिंग पार्टियां। स्रोत: सू
पिथौरागढ़/अल्मोड़ा/चंपावत/बागेश्वर/नैनीताल। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के मतदान में सिर्फ एक दिन बाकी है। लोकतंत्र का यह उत्सव सिर्फ बैलेट बॉक्स तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसे सीमांत और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में चुनाव कराने की प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी मिशन से कम नहीं है। कुमाऊं के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में दर्जनों ऐसे बूथ हैं जहां तक पहुंचने के लिए मतदानकर्मियों को सामान के साथ सात से लेकर 16 किमी तक की दूरी नापनी पड़ेगी। मानसूनकाल में पहाड़ी पगडंडियों और कच्चे रास्तों से होते हुए गुजरना मतदानकर्मियों की हिम्मत और जज्बे की असल परीक्षा भी है।
पंचायत चुनाव न केवल गांव की सरकार के गठन का पर्व है बल्कि यह स्थानीय जीवन और भौगोलिक चुनौतियों का भी प्रतीक है। यह दर्शाता है कि लोकतंत्र की जड़ें कितनी मजबूत हैं। चाहे रास्ते कितने भी कठिन क्यों न हों, हर कठिनाई को पार कर, पोलिंग कर्मचारी अपने कर्तव्य का निर्वाह करने को आगे बढ़ चुके हैं।
पिथौरागढ़ में सबसे ज्यादा दुर्गम पोलिंग बूथ
जिले का कनार मतदान केंद्र इस बार राज्य का सबसे दुर्गम साबित हुआ है। धारचूला विकासखंड में स्थित इस केंद्र तक पहुंचने के लिए पोलिंग पार्टी को 16 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। यहां तक सड़क नहीं है और रास्ता पूरी तरह से पहाड़ी और पथरीला है। डीडीहाट विकासखंड में गराली, बमनीगाड़ और मलकुड़ा जैसे क्षेत्रों में 5 से 6 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। कनालीछीना और मुनस्यारी विकासखंडों में भी कई मतदान केंद्र ऐसे हैं जो सड़क से छह किमी या उससे अधिक दूरी पर हैं। खोलियागांव, चमडुंगरी, ख्वांकोट के बूथ सड़क से तीन किमी दूर हैं।
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मुनस्यारी विकासखंड में सबसे अधिक मतदान केंद्र दुरूह हैं। माणी धामी, दारमा, क्वीरी, बोना तक पहुंचने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। पत्थरकोट गैला मल्ला, कुलथम और उमडाडा मतदान केंद्रों की दूरी सड़क से छह किमी है। 12 से अधिक केंद्र ऐसे हैं जो सड़क से तीन से चार किमी की दूरी पर हैं। सुवा छह किमी और मेतली पांच किमी की दूरी पर हैं। सबसे दूरस्थ केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को दो दिन पहले रवाना होना पड़ता है।
चंपावत में 182 पोलिंग पार्टियों को चलना होगा पैदल
जिले में पाटी और लोहाघाट ब्लॉकों के 160 से अधिक बूथों तक पोलिंग पार्टियों को पैदल पहुंचना है। दो पोलिंग बूथों तक छह किमी तक की चढ़ाई है। जिले के 487 वार्डों में 38,000 से अधिक मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों को चुनेंगे। प्रशासन ने सभी टीमों को ट्रैकिंग बैग, टॉर्च, प्राथमिक चिकित्सा किट और मैप उपलब्ध कराए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी भूपेंद्र कुमार आर्या ने बताया कि कई पार्टियों को पांच किमी तक की पैदल यात्रा पोलिंग बूथ तक पहुंचने के लिए करनी होगी। करीब दो पार्टियों को 6 किमी पैदल चलकर पोलिंग बूथ तक पहुंचना होगा। जिले में 24 जुलाई को होने वाले प्रथम चरण का मतदान कराने के लिए पाटी और लोहाघाट में 182 पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी।
अल्मोड़ा के भैंसियाछाना और लमगड़ा में आठ किमी तक पैदल ड्यूटी
जिले में पहले चरण के लिए कुल 649 पोलिंग पार्टियां रवाना की गई हैं। इनमें से कुछ को 5 से 10 किमी तक पैदल चलकर बूथ तक पहुंचना होगा। भैंसियाछाना ब्लॉक के बबुरियानायल और लमगड़ा ब्लॉक के ध्यूलीधौनी, दोघौड़िया और सिमल्टी गांव ऐसे उदाहरण हैं जहां पांच से आठ किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। जिले में पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिए पांच किमी की पैदल दूरी वाले 582 मतदान केंद्र और 644 मतदेय स्थल हैं। पांच से 10 किमी की पैदल दूरी वाले पांच मतदान केंद्र और मतदेय स्थल बनाए गए हैं। मतदान के पहले दिन 649 पोलिंग पार्टियां मतदान कराने के लिए रवाना होंगी।
बागेश्वर में 82 मतदान केंद्र अब भी सड़क से दूर
जिले में 82 ऐसे मतदान केंद्र हैं जहां अब भी सड़कें नहीं हैं। कपकोट, गरुड़ और बागेश्वर ब्लॉक के इन क्षेत्रों में पोलिंग पार्टियों को 7-8 किमी पैदल चलना पड़ेगा। भौगोलिक स्थिति के अनुसार कपकोट और बागेश्वर ब्लॉक के 30-30, गरुड़ के 22 बूथों तक पहंचने के लिए सड़क नहीं है। राप्रावि सोराग, डौला, बाछम और नरगड़ा जैसे गांवों में ट्रैकिंग जैसी स्थिति बन गई है। कपकोट ब्लॉक के राइंका सोराग में बने पूर्वी और पश्चिमी बूथ तक पहुंचने के लिए सात किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी। राप्रावि डौला बूथ की सड़क से पैदल दूरी छह किमी है। राप्रावि कीमू, राप्रावि कालापैरकापड़ी, राप्रावि सुखचौना की पैदल दूरी पांच किमी है। बागेश्वर ब्लॉक के राप्रावि ऐराड़ी और राप्रावि ग्वाड़ सड़क से चार किमी दूर हैं। 28 बूथों तक पहुंचने के लिए सड़क से एक से तीन किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। गरुड़ ब्लॉक का राप्रावि थापलबजवाड़ सड़क से चार किमी दूर है और 21 बूथों तक जाने के लिए मतदान पार्टियों को एक से तीन किमी पैदल चलना होगा।
नामिक, मर्तोली और बुर्फू तक पहली बार वाहन से पहुंची टीम
पिथौरागढ़। इस बार की एक सकारात्मक खबर यह भी है कि पिथौरागढ़ के तीन बेहद दुर्गम बूथ नामिक, मर्तोली और बुर्फू अब सड़क से जुड़ गए हैं। पहले नामिक पहुंचने के लिए 16 किमी, मर्तोली के लिए 42 किमी और बुर्फू मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए 48 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। अब पहली बार इन तीनों केंद्रों तक मतदान कर्मी वाहन से पहुंचे। पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों तक पहुंच सकें इसके लिए प्रशासन की ओर से बरसात में बंद सड़कों को प्राथमिकता पर खुलवाया गया। संवाद
नैनीताल के ओखलकांडा और बेतालघाट दूरस्थ मतदान केंद्र
जिले में 24 और 28 जुलाई को दो चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होना है। पहले चरण में ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी और रामगढ़ ब्लॉक में चुनाव होगा। एडीएम नैनीताल विवेक राय ने बताया कि पंचायत चुनाव के मद्देनजर मंगलवार को ओखलकांडा ब्लॉक की 33 और बेतालघाट ब्लॉक की तीन पोलिंग पार्टियां मतदान से दो दिन पहले ही मतदान केंद्रों पर पहुंच गई हैं जबकि धारी, ओखलकांडा, रामगढ़ और बेतालघाट ब्लॉक की शेष पोलिंग पार्टियां बुधवार को रवाना होंगी।
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पंचायत चुनाव न केवल गांव की सरकार के गठन का पर्व है बल्कि यह स्थानीय जीवन और भौगोलिक चुनौतियों का भी प्रतीक है। यह दर्शाता है कि लोकतंत्र की जड़ें कितनी मजबूत हैं। चाहे रास्ते कितने भी कठिन क्यों न हों, हर कठिनाई को पार कर, पोलिंग कर्मचारी अपने कर्तव्य का निर्वाह करने को आगे बढ़ चुके हैं।
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पिथौरागढ़ में सबसे ज्यादा दुर्गम पोलिंग बूथ
जिले का कनार मतदान केंद्र इस बार राज्य का सबसे दुर्गम साबित हुआ है। धारचूला विकासखंड में स्थित इस केंद्र तक पहुंचने के लिए पोलिंग पार्टी को 16 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। यहां तक सड़क नहीं है और रास्ता पूरी तरह से पहाड़ी और पथरीला है। डीडीहाट विकासखंड में गराली, बमनीगाड़ और मलकुड़ा जैसे क्षेत्रों में 5 से 6 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। कनालीछीना और मुनस्यारी विकासखंडों में भी कई मतदान केंद्र ऐसे हैं जो सड़क से छह किमी या उससे अधिक दूरी पर हैं। खोलियागांव, चमडुंगरी, ख्वांकोट के बूथ सड़क से तीन किमी दूर हैं।
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मुनस्यारी विकासखंड में सबसे अधिक मतदान केंद्र दुरूह हैं। माणी धामी, दारमा, क्वीरी, बोना तक पहुंचने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। पत्थरकोट गैला मल्ला, कुलथम और उमडाडा मतदान केंद्रों की दूरी सड़क से छह किमी है। 12 से अधिक केंद्र ऐसे हैं जो सड़क से तीन से चार किमी की दूरी पर हैं। सुवा छह किमी और मेतली पांच किमी की दूरी पर हैं। सबसे दूरस्थ केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को दो दिन पहले रवाना होना पड़ता है।
चंपावत में 182 पोलिंग पार्टियों को चलना होगा पैदल
जिले में पाटी और लोहाघाट ब्लॉकों के 160 से अधिक बूथों तक पोलिंग पार्टियों को पैदल पहुंचना है। दो पोलिंग बूथों तक छह किमी तक की चढ़ाई है। जिले के 487 वार्डों में 38,000 से अधिक मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों को चुनेंगे। प्रशासन ने सभी टीमों को ट्रैकिंग बैग, टॉर्च, प्राथमिक चिकित्सा किट और मैप उपलब्ध कराए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी भूपेंद्र कुमार आर्या ने बताया कि कई पार्टियों को पांच किमी तक की पैदल यात्रा पोलिंग बूथ तक पहुंचने के लिए करनी होगी। करीब दो पार्टियों को 6 किमी पैदल चलकर पोलिंग बूथ तक पहुंचना होगा। जिले में 24 जुलाई को होने वाले प्रथम चरण का मतदान कराने के लिए पाटी और लोहाघाट में 182 पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी।
अल्मोड़ा के भैंसियाछाना और लमगड़ा में आठ किमी तक पैदल ड्यूटी
जिले में पहले चरण के लिए कुल 649 पोलिंग पार्टियां रवाना की गई हैं। इनमें से कुछ को 5 से 10 किमी तक पैदल चलकर बूथ तक पहुंचना होगा। भैंसियाछाना ब्लॉक के बबुरियानायल और लमगड़ा ब्लॉक के ध्यूलीधौनी, दोघौड़िया और सिमल्टी गांव ऐसे उदाहरण हैं जहां पांच से आठ किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। जिले में पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिए पांच किमी की पैदल दूरी वाले 582 मतदान केंद्र और 644 मतदेय स्थल हैं। पांच से 10 किमी की पैदल दूरी वाले पांच मतदान केंद्र और मतदेय स्थल बनाए गए हैं। मतदान के पहले दिन 649 पोलिंग पार्टियां मतदान कराने के लिए रवाना होंगी।
बागेश्वर में 82 मतदान केंद्र अब भी सड़क से दूर
जिले में 82 ऐसे मतदान केंद्र हैं जहां अब भी सड़कें नहीं हैं। कपकोट, गरुड़ और बागेश्वर ब्लॉक के इन क्षेत्रों में पोलिंग पार्टियों को 7-8 किमी पैदल चलना पड़ेगा। भौगोलिक स्थिति के अनुसार कपकोट और बागेश्वर ब्लॉक के 30-30, गरुड़ के 22 बूथों तक पहंचने के लिए सड़क नहीं है। राप्रावि सोराग, डौला, बाछम और नरगड़ा जैसे गांवों में ट्रैकिंग जैसी स्थिति बन गई है। कपकोट ब्लॉक के राइंका सोराग में बने पूर्वी और पश्चिमी बूथ तक पहुंचने के लिए सात किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी। राप्रावि डौला बूथ की सड़क से पैदल दूरी छह किमी है। राप्रावि कीमू, राप्रावि कालापैरकापड़ी, राप्रावि सुखचौना की पैदल दूरी पांच किमी है। बागेश्वर ब्लॉक के राप्रावि ऐराड़ी और राप्रावि ग्वाड़ सड़क से चार किमी दूर हैं। 28 बूथों तक पहुंचने के लिए सड़क से एक से तीन किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। गरुड़ ब्लॉक का राप्रावि थापलबजवाड़ सड़क से चार किमी दूर है और 21 बूथों तक जाने के लिए मतदान पार्टियों को एक से तीन किमी पैदल चलना होगा।
नामिक, मर्तोली और बुर्फू तक पहली बार वाहन से पहुंची टीम
पिथौरागढ़। इस बार की एक सकारात्मक खबर यह भी है कि पिथौरागढ़ के तीन बेहद दुर्गम बूथ नामिक, मर्तोली और बुर्फू अब सड़क से जुड़ गए हैं। पहले नामिक पहुंचने के लिए 16 किमी, मर्तोली के लिए 42 किमी और बुर्फू मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए 48 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। अब पहली बार इन तीनों केंद्रों तक मतदान कर्मी वाहन से पहुंचे। पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों तक पहुंच सकें इसके लिए प्रशासन की ओर से बरसात में बंद सड़कों को प्राथमिकता पर खुलवाया गया। संवाद
नैनीताल के ओखलकांडा और बेतालघाट दूरस्थ मतदान केंद्र
जिले में 24 और 28 जुलाई को दो चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होना है। पहले चरण में ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी और रामगढ़ ब्लॉक में चुनाव होगा। एडीएम नैनीताल विवेक राय ने बताया कि पंचायत चुनाव के मद्देनजर मंगलवार को ओखलकांडा ब्लॉक की 33 और बेतालघाट ब्लॉक की तीन पोलिंग पार्टियां मतदान से दो दिन पहले ही मतदान केंद्रों पर पहुंच गई हैं जबकि धारी, ओखलकांडा, रामगढ़ और बेतालघाट ब्लॉक की शेष पोलिंग पार्टियां बुधवार को रवाना होंगी।