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ऐसे तो टेंट में गुजर जाएगी तल्ला भदेली के 13 परिवारों की जिंदगी
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 24 Jul 2018 10:46 PM IST
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मुनस्यारी के भदेली में टेंटों में रह रहे आपदा प्रभावित
- फोटो : अमर उजाला
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पुनर्वास को लेकर सरकारी कोशिश को देखने पर लगता है कि तल्ला भदेली के 13 परिवारों को शायद टेंट में ही जिंदगी गुजारनी होगी। दो जुलाई की आपदा के बाद ये लोग गांव छोड़कर टेंट में रहने को विवश हैं। हाल यह है कि बीते सालों की आपदाओं में 149 परिवारों को अपना रैन बसेरा गंवाना पड़ा है और आज तक इन लोगों का पुनर्वास नहीं हो पाया है।
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जिले में 13 गांवों के 149 परिवारों का विस्थापन होना बाकी है। ये परिवार हैं जो आपदा का दंश सहने के बाद मूल स्थान को छोड़कर इधर उधर रहने को विवश हैं। इनकी ओर से पुनर्वास की मांग की जाती रही है। इतना होने पर भी इनमें से एक भी परिवार का पुनर्वास नहीं हो पाया है। यह तब है जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम कहता है कि आपदा प्रभावितों को राहत देने का मतलब है कि उनका जीवन स्तर आपदा पूर्व की स्थिति का हो जाए।
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साफ है कि टेंट में रह रहे चौना ग्राम पंचायत के तल्ला भदेली गांव के 13 परिवार शायद ही टेंट से बाहर निकल पाएं। गांव के 32 लोगों को प्रशासन ने टैंटों में रखा है। तहसील प्रशासन गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने के बाद पुनर्वास की संस्तुति करने की बात कर रहा है। गांव के लोग सुरक्षित स्थान पर विस्थापन चाहते हैं।
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इनका नहीं हुआ विस्थापन....
वर्ष 2017 तक प्रशासन ने मुनस्यारी के कुलथम के 15, सैनर के 21, धारचूला के रक्षाताल के 5, तांकुल के 16, नाचनी के नई बस्ती के 7, बंगापानी के साणा के 6. तोमिक के 4, खुमती के 11, कनार टोयला के 5, साईभाट के 10, गोल्फा के 15, खिमसुवा के 19, झिमर गांव के 15 परिवारों को विस्थापन की सूची में रखा है।
तल्ला भदेली का विस्थापन होना चाहिए
भदेली दशकों से आपदा का दंश झेल रहा है। गोरी नदी लगातार गांव की जमीन को लील रही है। इस बार खतरा और गंभीर हो गया है। वर्ष 2013 में प्रशासन ने भदेली को विस्थापित करने की बात कही थी, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। तल्ला भदेली के सभी परिवारों का विस्थापन होना चाहिए। मल्ला भदेली को बचाने के उपाय होना चाहिए।
चौना की ग्राम प्रधान पुष्पा चिराल
सुरक्षा दीवार न बनने से खतरे में आया गांव
सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा दीवार न लगाने से तल्ला भदेली खतरे की जद में आया है। बीआरओ ने सुरक्षा दीवार लगाने का भरोसा तो दिलाया लेकिन लगाई नहीं। नदी ने बेशकीमती जमीन लील चुकी है। अब गांव को ही खतरा उत्पन्न हो गया है। बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।
मेहर सिंह फर्स्वाण, भदेली निवासी
विस्थापन के नाम पर छला जाता है
लोग दहशत में हैं। सरकार गांव के लोगों की जिंदगी बचाना चाहती है तो उन लोगों को सुरक्षित स्थान पर पूर्ण सुविधा के साथ विस्थापित करना चाहिए। विस्थापन के नाम पर गांव के लोगों को छला जाता है।
हयात सिंह फर्स्वाण, निवासी तल्ला भदेली