दरार पड़ने से खिसक रही जमीन
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नाचनी (पिथौरागढ़)। दशकों से रामगंगा का कटाव झेल रहा रसियाबगड़ गांव खतरे की जद में है। गांव में डेढ़ किमी हिस्से में जमीन में दरार पड़ गई है। रसियाबगड़ में 15 परिवार रहते हैं। इससे बोरागांव के लिए भ्ाी खतरा पैदा हो गया है। लगातार हो रही बारिश से जमीन में पड़ी दरार का आकार बढ़ता जा रहा है। जमीन रामगंगा में समाती जा रही है।
रामगंगा के कटाव से रसियाबगड़ की पहाड़ी बुरी तरह दरक गई है। रसियाबगड़ में रंजीत सिंह पांगती के मकान से 150 मीटर की दूरी तक दरार आ गई है। डेड़ किमी लंबी यह दरार प्राथमिक पाठशाला बोरागांव से 300 मीटर नीचे तक पहुंच गई है। चीड़, चारा आदि के पेड़ भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं।
रसियाबगड़ के जनार्दन पांगती, राम सिंह पांगती, रणजीत सिंह पांगती, भागीरथी देवी, नरेंद्र सिंह कमला देवी के आम के बगीचे, जमीन में दरार आ गई है। रामगंगा से लगातार भूकटाव हो रहा है। हालात ऐसे ही बने रहे तो रसियाबगड़ गांव में आवासीय मकान भूकटाव की जद में आ सकते हैं।
पड़ोस के बोरागांव के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। भूकटाव से लोगों में भय व्याप्त है। नाचनी के रसियाबगड़ के साथ ही रातीगाड़, हरड़िया, नया बस्ती में कई सालों से भूकटाव हो रहा है। नाले गंभीर खतरा बने हैं। इलाके के लोग लंबे समय से नदी का रुख पलटने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद इसमें गंभीरता से कार्य नहीं हो रहा है। इस क्षेत्र को भूकटाव से बचाने के लिए नीति बनाने में सरकारी अमला नाकाम रहा है।