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केवीके में चतुर्थ श्रेणी का कोई स्टाफ नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 25 Aug 2015 06:21 PM IST
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केंद्र सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों में वैज्ञानिकों की संख्या अब कम
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से कम दस करने का फैसला लिया है। जल्दी ही पिथौरागढ़ स्थित कृषि विज्ञान
केंद्र में वैज्ञानिकों की संख्या छह से बढ़कर दस हो जाएगी। दस वर्ष पहले
यहां उद्यान विभाग के गैना फार्म में खोले गए केवीके के वैज्ञानिकों का
दावा है कि इस केंद्र में जिले के किसानों को अरहर, हाइब्रीड धान, ढिबरी और
बटन मशरूम के उत्पादन के लिए प्रेरित किया। कीवी फल को लोग पैदा करने लगे
हैं। पावर टिलर से जुताई की तकनीक केवीके ने ही प्रदान की। पॉलीहाउस में
सब्जियां उगाने की तकनीक गांवों तक पहुंचाई गई।
कृषि विज्ञान केंद्र में इस समय प्रभारी डा. जितेंद्र क्वात्रा समेत कुल छह वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इस केंद्र में चतुर्थ श्रेणी का कोई पद नहीं है। वैज्ञानिक अपना काम खुद करते हैं। इसके अलावा एक ट्रेनी असिस्टेंट, एक कंप्यूटर प्रोग्रामर, एक अकाउंटेंट, एक स्टेनो यहां पर कार्यरत हैं। कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में इस समय गहत, अरहर, धान और सब्जियों को प्रदर्शन के तौर पर बोया गया है। मात्र 60 दिन में तैयार होने वाली लोबिया की फसल को बोने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया है। केवीके परिसर में बादाम के नए पौधों का रोपण किया गया है। जड़ी-बूटियों की खेती का प्रसार किया जा रहा है। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आरके सिंह दावा करते हैं कि जिले के किसानों को दिशा देने का काम इस केंद्र ने किया है। भविष्य में वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ेगी तो काम में और गति आएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र में इस समय प्रभारी डा. जितेंद्र क्वात्रा समेत कुल छह वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इस केंद्र में चतुर्थ श्रेणी का कोई पद नहीं है। वैज्ञानिक अपना काम खुद करते हैं। इसके अलावा एक ट्रेनी असिस्टेंट, एक कंप्यूटर प्रोग्रामर, एक अकाउंटेंट, एक स्टेनो यहां पर कार्यरत हैं। कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में इस समय गहत, अरहर, धान और सब्जियों को प्रदर्शन के तौर पर बोया गया है। मात्र 60 दिन में तैयार होने वाली लोबिया की फसल को बोने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया है। केवीके परिसर में बादाम के नए पौधों का रोपण किया गया है। जड़ी-बूटियों की खेती का प्रसार किया जा रहा है। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आरके सिंह दावा करते हैं कि जिले के किसानों को दिशा देने का काम इस केंद्र ने किया है। भविष्य में वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ेगी तो काम में और गति आएगी।