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कुमाऊंनी संस्कृति की झलक दिखाएगा पिथौरागढ़ किला

Sat, 03 Feb 2018 10:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 03 Feb 2018 10:19 PM IST
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Kumaon will showcase the culture of Pithoragarh fort
पिथौरागढ़ का ऐतिहासिक गोरखा किला - फोटो : अमर उजाला

सुंदरीकरण के बाद ऐतिहासिक पिथौरागढ़ किला कुमाऊंनी संस्कृति की झलक दिखाएगा। इसे स्थानीय संस्कृति की थीम पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही किले में पीपीपी मोड पर पर्यटन व्यवस्थाओं का संचालन किया जाएगा। इसमें स्थानीय कारोबारियों की भागीदारी होगी। किले को कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपने का फैसला भी कर लिया गया है।

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लगभग पांच करोड़ की लागत से किले के सुंदरीकरण का काम पूरा होने वाला है। अब तक कार्यदायी संस्था पर्यटन संरचना विकास निवेश कार्यक्रम भीमताल 92 फीसदी से अधिक काम कर चुकी है। कार्यदायी संस्था ने 15 फरवरी तक काम पूरा करने का भरोसा दिलाया है। इस बीच जिला प्रशासन ने किले की व्यवस्थाओं के संचालन का जिम्मा कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपने का फैसला किया है। साथ ही तय किया कि किले की पर्यटन व्यवस्थाएं पीपीपी मोड पर संचालित की जाएगी।
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शनिवार को डीएम सी रविशंकर ने किले की व्यवस्थाओं के संचालन को लेकर पर्यटन विभाग और कारोबारियों के साथ बैठक की। इस दौरान चर्चा के बाद किले का संचालन कुमंविनि को सौंपने का फैसला लिया। डीएम ने बताया कि किले को स्थानीय संस्कृति की थीम पर विकसित किया जाएगा। पर्यटन अधिकारियों को राजस्थान, अंडमान आदि राज्यों की तर्ज पर किले के विकास का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। कुमंविनि पीपीपी मोड पर पर्यटन व्यवस्थाओं का संचालन करेगा। इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी तय होगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही संबंधित विभागों की बैठक के बाद योजना को मूर्त रूप दे दिया जाएगा। 
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गंगोलीहाट महाकाली मंदिर का बनेगा मास्टर प्लान
अतिक्रमण को लेकर विवादों के घेरे में आए गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर का मास्टर प्लान बनाया जाएगा। इससे पहले मंदिर भूमि का सीमांकन भी किया जाएगा। महाकाली मंदिर में जिला पंचायत लाखों की लागत से निर्माण कार्य करा रही है। इससे पहले भी समय-समय पर लाखों की लागत से निर्माण होते रहे हैं, लेकिन उचित नियोजन के अभाव में निर्माण असुविधाजनक और अव्यवहारिक साबित हुए। इससे स्थानीय लोगों में असंतोष तो है ही, पर्यटकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को पर्यटन विभाग की बैठक में मंदिर कमेटी ने निर्माण कार्यों की बेतरतीबी को देखते हुए प्लान की मांग उठाई। साथ ही उचित नियोजन की मांग की। डीएम का कहना है कि संबंधित एजेंसी को मंदिर का मास्टर प्लान बनाने को कहा है। इससे बेतरतीब निर्माण से निजात मिलेगी।


बेड़ीनाग वासुकी मंदिर का होगा सीमांकन
बेड़ीनाग के वासुकी मंदिर के संरक्षण के लिए भी भूमि का सीमांकन किया जाएगा। डीएम ने पर्यटन अधिकारियों को सीमांकन के निर्देश दिए हैं। सीमांकन के बाद अतिक्रमण की आशंका से निजात मिलेगी और भविष्य में मंदिर को विकसित करने की राह भी खुलेगी।

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