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झूलाघाट पशु अस्पताल में चार साल से डाक्टर नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला,झूलाघाट /पिथौरागढ़
Updated Tue, 16 Feb 2016 10:28 PM IST
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नेपाल सीमा से सटे झूलाघाट के राजकीय पशु अस्पताल में चार साल से डाक्टर नहीं है। किराए के भवन में अस्पताल चल रहा है उसकी हालत ऐसी है कि वह किसी भी समय गिर सकता है। अस्पताल में नेपाल के दो दर्जन गांवों के लोग भी जानवरों के लिए दवाएं लेने आते हैं। 1987 में यह अस्पताल बना। तब से दो कमरे वाले किराए के मकान में चल रहा है। मकान मालिक ने शुरुआत में एक वर्ष तक मकान का कोई किराया नहीं लिया। 1988 से किराए की दर तय हुई तो यह मात्र 175 रुपये प्रतिमाह मिलता है।
जिस भवन में यह अस्पताल चलता है उसका निर्माण 1961 में हो गया था। पत्थर की छत वाला यह भवन टपकता रहता है। दीवारें खराब हो गई हैं। मकान मालिक ने अब तक भवन की मरम्मत नहीं की है। अस्पताल में डाक्टर, फार्मेसिस्ट, सहायक स्टाफ और स्वच्छक के पद सृजित हैं लेकिन डाक्टर और सहायक के पद चार साल से रिक्त हैं।
मकान मालिक चंद्री चंद का कहना है कि जब मकान का किराया तय हुआ तब कहा गया था कि हर तीसरे महीने किराया बढ़ाया जाएगा लेकिन अभी तक किराए की राशि नहीं बढ़ी है। अस्पताल के फार्मेसिस्ट आरबी पाटनी का कहना है कि अस्पताल में रोजाना 10-12 पशु रोज आते हैं। नेपाल के गांवों से भी पशुपालक दवा के लिए आते हैं। वह कहते हैं कि अस्पताल में दवाएं तो हैं लेकिन डाक्टर न होने से दिक्कत पेश आ रही है।
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12 अस्पतालों में नहीं हैं डाक्टर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीएस धामी का कहना है कि जिले में 28 पशु अस्पताल हैं लेकिन 12 अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। डाक्टरों की नियुक्ति के लिए निदेशालय को पत्र लिख दिए गए हैं। उनका कहना है कि इस बार जिले को कुछ डाक्टर मिलने की उम्मीद है।
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जिस भवन में यह अस्पताल चलता है उसका निर्माण 1961 में हो गया था। पत्थर की छत वाला यह भवन टपकता रहता है। दीवारें खराब हो गई हैं। मकान मालिक ने अब तक भवन की मरम्मत नहीं की है। अस्पताल में डाक्टर, फार्मेसिस्ट, सहायक स्टाफ और स्वच्छक के पद सृजित हैं लेकिन डाक्टर और सहायक के पद चार साल से रिक्त हैं।
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मकान मालिक चंद्री चंद का कहना है कि जब मकान का किराया तय हुआ तब कहा गया था कि हर तीसरे महीने किराया बढ़ाया जाएगा लेकिन अभी तक किराए की राशि नहीं बढ़ी है। अस्पताल के फार्मेसिस्ट आरबी पाटनी का कहना है कि अस्पताल में रोजाना 10-12 पशु रोज आते हैं। नेपाल के गांवों से भी पशुपालक दवा के लिए आते हैं। वह कहते हैं कि अस्पताल में दवाएं तो हैं लेकिन डाक्टर न होने से दिक्कत पेश आ रही है।
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12 अस्पतालों में नहीं हैं डाक्टर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीएस धामी का कहना है कि जिले में 28 पशु अस्पताल हैं लेकिन 12 अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। डाक्टरों की नियुक्ति के लिए निदेशालय को पत्र लिख दिए गए हैं। उनका कहना है कि इस बार जिले को कुछ डाक्टर मिलने की उम्मीद है।