{"_id":"5a0c73794f1c1bc9678bbda0","slug":"jolgibi-fair-festers-cultural-events","type":"story","status":"publish","title_hn":"जौलजीबी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जौलजीबी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:33 PM IST
विज्ञापन
जौलजीबी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करती छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
जौलजीबी मेले में मंगलवार रात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रही। कई सांस्कृतिक दलों, विद्यालयों के कलाकारों ने कुमाऊंनी, नेपाली, गढ़वाली, राजस्थानी, पंजाबी गीत पेश कर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कलाकारों ने मंच से जब डाणू काणू में बुरांशी फूलो, जौलजिबि म्याल जानू ओ कमला गीत पेश किया तो दर्शक झूमने लगे। उसके बाद हाय तेरी रुमाला गुलाबी मुखड़ी, के भली लागि रै नाकै कि नथुली गीत का भी दर्शकों ने जमकर आनंद उठाया।
विज्ञापन
पहली शाम ज्वालेश्वर सांस्कृतिक दल जौलजीबी, छिपलाकेदार सांस्कृतिक समिति गलाती के कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इससे पहले जीआईसी जौलजीबी, जीजीआईसी जौलजीबी, विवेकानंद विद्या मंदिर धारचूला, जीजीआईसी धारचूला के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झड़ी लगा दी।
विज्ञापन
ज्वालेश्वर सांस्कृतिक दल ने अपने शिव पूजन नाटिका की प्रस्तुति दी। साथ ही इस दल ने कुमाऊंनी गीत भी पेश किए। छिपलाकेदार सांस्कृतिक समिति के कार्यक्रमों का भी दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। शाम के कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केदार जोशी थे।
विज्ञापन
मेलाधिकारी आरके पांडे ने बताया कि अगले चरण में रं कम्युनिटी स्कूल धारचूला, गायत्री विद्या मंदिर धारचूला, जीआईसी धारचूला के कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा लोकगायक प्रकाश रावत, जितेंद्र तोमक्याल, ललित मोहन जोशी, पुष्कर महर, तारा पथनी को भी मेले में बुलाया गया है। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण बिष्ट, करण थापा, डीएन भट्ट ने किया।
सामान तो खूब पहुंचा पर ग्राहकों की कमी
जौलजीबी मेले में लगी अस्थायी दुकानों में सामान तो खूब पहुंच गया है, लेकिन ग्राहकों की अभी आवाजाही शुरू नहीं हो पाई है। जौलजीबी मेले में मुख्य रूप से तिब्बत की मंडी से लाया गया सामान बिकता है। इसके अलावा रेडीमेड कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, मिठाइयों की दुकानें भी सज गई हैं। बुधवार को मेले में ज्यादा चहल-पहल नहीं रही। ग्राहक कम संख्या में आए। नेपाल से भी ज्यादा संख्या में लोग नहीं आ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि 17 नवंबर से मेले में चहल-पहल बढ़ेगी। इस बार प्रशासन ने मेले की अवधि 24 नवंबर तक तय की है। उसके बाद भी लोगों की आवाजाही बनी रहने पर 30 नवंबर तक अस्थायी दुकानें लगी रहेंगी। जौलजीबी व्यापार संघ अध्यक्ष धीरेंद्र धर्मशक्तू ने बताया कि शुरुआत में मेला फीका रहता है। एक-दो दिन बाद लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार मेले में कारोबार ज्यादा होगा। तिब्बत की मंडी तकलाकोट से व्यापारी जैकेट, ऊनी कंबल, रजाइयां, विशेष प्रकार की टॉफी जैसी सामग्री लेकर पहुंचे हैं।