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Pithoragarh News: बालिका विद्यालयों में 55 शिक्षक पद रिक्त, दो हजार छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित
Sun, 04 Oct 2026 12:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:06 AM IST
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चंपावत। चंपावत जिले के बालिका विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है जिससे करीब 2000 छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रदेश सरकार बालिकाओं के जन्म, स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसके बावजूद जिले के एक हाईस्कूल और सात इंटर कॉलेजों में 140 स्वीकृत पदों में से 55 पद वर्षों से खाली हैं।
चंपावत, बाराकोट, लोहाघाट और पाटी विकासखंडों में कुल सात राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और एक राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में कक्षा छह से 12वीं तक 2050 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। शिक्षकों की कमी के कारण इन सभी विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था के तहत चल रही है। इससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यालयों में छात्राओं की संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है। प्रदेश सरकार एक ओर बालिकाओं के जन्म, स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं, दूसरी ओर चंपावत जिले में बालिकाओं के लिए संचालित विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव बना हुआ है। यह स्थिति चिंताजनक है।
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सहायक अध्यापकों के 78 पद स्वीकृत, 62 पर शिक्षक कार्यरत
जिले के बालिका विद्यालयों में एलटी संवर्ग में सहायक अध्यापकों के 78 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष 62 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे 14 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रवक्ता संवर्ग में स्थिति और भी खराब है। इस संवर्ग में प्रवक्ताओं के 68 पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल 23 प्रवक्ता कार्यरत हैं। इस प्रकार प्रवक्ता संवर्ग में 44 पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
दो वर्षों में 150 बालिकाएं कम हुईं
जिला मुख्यालय स्थित पीएमश्री बालिका इंटर कॉलेज चंपावत भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अभिभावकों ने छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पीटीए के तहत चार शिक्षकों को नियुक्त किया है। प्रभारी प्रधानाचार्य भुवनेश्वरी फोनिया ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विद्यालय में 150 से अधिक छात्राओं की संख्या कम हुई है। विद्यालय में प्रवक्ताओं के 10 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान में केवल गृह विज्ञान विषय में एक स्थायी प्रवक्ता कार्यरत हैं। अन्य विषयों में अध्यापन कार्य व्यवस्था के तहत ही कराया जा रहा है।
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एक भी विद्यालय में नहीं है स्थायी प्रधानाचार्य
बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद पर एक भी स्थायी प्रधानाचार्य नहीं हैं। सभी विद्यालयों में लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में तैनात अन्य शिक्षक को प्रधानाचार्य का प्रभार दिया गया है। उनके लिए विभागीय कार्य के साथ अपने विषय को पढ़ाना चुनौती है। इससे भी बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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बालिकाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेजी गई है। नियुक्तियां होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। -मान सिंह, प्रभारी सीईओ, चंपावत
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चंपावत, बाराकोट, लोहाघाट और पाटी विकासखंडों में कुल सात राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और एक राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में कक्षा छह से 12वीं तक 2050 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। शिक्षकों की कमी के कारण इन सभी विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था के तहत चल रही है। इससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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विद्यालयों में छात्राओं की संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है। प्रदेश सरकार एक ओर बालिकाओं के जन्म, स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं, दूसरी ओर चंपावत जिले में बालिकाओं के लिए संचालित विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव बना हुआ है। यह स्थिति चिंताजनक है।
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सहायक अध्यापकों के 78 पद स्वीकृत, 62 पर शिक्षक कार्यरत
जिले के बालिका विद्यालयों में एलटी संवर्ग में सहायक अध्यापकों के 78 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष 62 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे 14 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रवक्ता संवर्ग में स्थिति और भी खराब है। इस संवर्ग में प्रवक्ताओं के 68 पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल 23 प्रवक्ता कार्यरत हैं। इस प्रकार प्रवक्ता संवर्ग में 44 पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
दो वर्षों में 150 बालिकाएं कम हुईं
जिला मुख्यालय स्थित पीएमश्री बालिका इंटर कॉलेज चंपावत भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अभिभावकों ने छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पीटीए के तहत चार शिक्षकों को नियुक्त किया है। प्रभारी प्रधानाचार्य भुवनेश्वरी फोनिया ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विद्यालय में 150 से अधिक छात्राओं की संख्या कम हुई है। विद्यालय में प्रवक्ताओं के 10 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान में केवल गृह विज्ञान विषय में एक स्थायी प्रवक्ता कार्यरत हैं। अन्य विषयों में अध्यापन कार्य व्यवस्था के तहत ही कराया जा रहा है।
एक भी विद्यालय में नहीं है स्थायी प्रधानाचार्य
बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद पर एक भी स्थायी प्रधानाचार्य नहीं हैं। सभी विद्यालयों में लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में तैनात अन्य शिक्षक को प्रधानाचार्य का प्रभार दिया गया है। उनके लिए विभागीय कार्य के साथ अपने विषय को पढ़ाना चुनौती है। इससे भी बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बालिकाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेजी गई है। नियुक्तियां होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। -मान सिंह, प्रभारी सीईओ, चंपावत