जौलजीबी के अंतरराष्ट्रीय झूलापुल को खतरा
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जौलजीबी में महाकाली पर बने अंतरराष्ट्रीय झूलापुल को गंभीर खतरा हो गया है। वजह 30 जून की रात आई आपदा के समय पुल के भारतीय क्षेत्र में बनी दीवार का टूटना है। तब तो प्रशासन ने पुल पर आवागमन में खतरे की आशंका को देखते हुए पूरे जुलाई में इसे बंद किया गया। बाद में स्थानीय लोगों एवं व्यापारियों की मांग पर प्रशासन ने पुल को इस भरोसे पर आवागमन के लिए खोल दिया कि नेपाल की सेतु निर्माण समिति जल्द ही इसकी मरम्मत करेगी, लेकिन अब तक पुल की मरम्मत न होने से व्यापारी और जौलजीबी के लोग खासे आशंकित हैं। उनका कहना है कि 14 नवंबर तक पुल की मरम्मत की जाए, क्योंकि 14 नवंबर से ही जौलजीबी का ऐतिहासिक और व्यापारिक मेला शुरू होता है।
जौलजीबी व्यापार संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र धर्मशक्तू ने बताया कि मेले के दिन पुल से एक बार में सौ से ज्यादा लोग आवाजाही करते हैं। पुल के एक तरफ की दीवार टूटने से वह इतने लोगों का भार सहन नहीं कर पाएगा। मेले तक पुल की मरम्मत किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने पुल की मरम्मत करने के लिए धारचूला के एसडीएम को पत्र दिया है और नेपाल के अधिकारियों से तत्काल बात करने को कहा है। नेपाल सेतु निर्माण समिति के इंजीनियर काठमांडू से आते हैं।
वह महीने में एक बार ही चक्कर लगाते हैं। इस कारण मरम्मत का काम काफी धीमी गति से हो रहा है। जौलजीबी का झूलापुल 2013 में आई आपदा के समय बह गया था। नेपाल सरकार ने 90 लाख रुपए की लागत से 160 मीटर लंबे पुल का दोबारा निर्माण किया और उसे 14 नवंबर 2015 को आवागमन के लिए खोल दिया था।