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देवनागरी में तैयार की जजारही रं लिपि : गर्ब्याल
Sun, 14 Jan 2024 12:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 14 Jan 2024 12:01 PM IST
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धारचूला में रं भाषा दिवस के अवसर पर मौजूद समाज के प्रबुद्ध लोग। संवाद
धारचूला (पिथौरागढ़) । रं कल्याण संस्था और नंदन न्यास की ओर से रं संग्रहालय में रं भाषा दिवस सादगी से मनाया गया। रं भाषा की लिपि निर्माण के लिए गठित नंदन न्यास के संस्थापक स्व. नंदराम सिंह लाला के जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया। नंदन न्यास के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, केंद्रीय मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल, करन सिंह गर्ब्याल, धीरेंद्र दताल, नर सिंह नपलच्याल आदि ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
पहले दिन रं भाषा, लिपि, संस्कृति को लेकर विचार रखे गए। लिपि तैयार करने को लेकर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। रं परंपरा, किस्से, कहानी-कहावत, प्राचीन तकलाकोट व्यापार बंद होने पर चिंता जताई गई। अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल ने बताया कि कुंती लाला के निधन के कारण छलिया नृत्य का प्रदर्शन नहीं किया गया। बताया कि रं लिपि सभी समुदाय को समझ में आए इसके लिए देवनागरी में कार्य किया जा रहा है। समाज के बुद्धिजीवी रं लिपि को बनाने में लगे हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल ने बताया कि अगले साल 10 जनवरी को संस्था के सभी शाखाओं में रं भाषा दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर शांति नबियाल, मनसा कुटियाल, हरक बुदियाल, केदार कुटियाल, पूरन सेलाल, मोहन दताल, सुरेंद्र रौतेला, मोहन गुंज्याल आदि गीतकार, गायकों ने रं बोली में अपनी प्रस्तुति दी। संचालन शांति नबियाल ने किया। इस दौरान दीपक रोंकली, दिनेश चलाल, राम सिंह ह्यांकी, धर्मेंद्र गर्ब्याल, विशन बोनाल, अशोक नबियाल, अमृता ह्यांकी, पुष्पा लाला सहित संस्था के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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दास्तान ए सीमा प्रहरी पुस्तक का विमोचन
धारचूला। साहित्य उत्सव के दौरान लोकगीत में रं साहित्य, पुस्तक चर्चा, युगल प्रस्तुतियां, नेपाली साहित्य पर दोनों देशों के साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। बीएसएफ से सेवानिवृत्त डीआईजी केएस गुंज्याल के दास्तान ए सीमा प्रहरी पुस्तक का विमोचन किया गया। नेपाल से आए साहित्यकार चमन तिकंरी, पदम बड़ाल, जानकी पाल, सुमित्रा कुंवर आदि ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। संवाद
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पहले दिन रं भाषा, लिपि, संस्कृति को लेकर विचार रखे गए। लिपि तैयार करने को लेकर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। रं परंपरा, किस्से, कहानी-कहावत, प्राचीन तकलाकोट व्यापार बंद होने पर चिंता जताई गई। अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल ने बताया कि कुंती लाला के निधन के कारण छलिया नृत्य का प्रदर्शन नहीं किया गया। बताया कि रं लिपि सभी समुदाय को समझ में आए इसके लिए देवनागरी में कार्य किया जा रहा है। समाज के बुद्धिजीवी रं लिपि को बनाने में लगे हैं।
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल ने बताया कि अगले साल 10 जनवरी को संस्था के सभी शाखाओं में रं भाषा दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर शांति नबियाल, मनसा कुटियाल, हरक बुदियाल, केदार कुटियाल, पूरन सेलाल, मोहन दताल, सुरेंद्र रौतेला, मोहन गुंज्याल आदि गीतकार, गायकों ने रं बोली में अपनी प्रस्तुति दी। संचालन शांति नबियाल ने किया। इस दौरान दीपक रोंकली, दिनेश चलाल, राम सिंह ह्यांकी, धर्मेंद्र गर्ब्याल, विशन बोनाल, अशोक नबियाल, अमृता ह्यांकी, पुष्पा लाला सहित संस्था के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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दास्तान ए सीमा प्रहरी पुस्तक का विमोचन
धारचूला। साहित्य उत्सव के दौरान लोकगीत में रं साहित्य, पुस्तक चर्चा, युगल प्रस्तुतियां, नेपाली साहित्य पर दोनों देशों के साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। बीएसएफ से सेवानिवृत्त डीआईजी केएस गुंज्याल के दास्तान ए सीमा प्रहरी पुस्तक का विमोचन किया गया। नेपाल से आए साहित्यकार चमन तिकंरी, पदम बड़ाल, जानकी पाल, सुमित्रा कुंवर आदि ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। संवाद