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भारतीय मुद्रा अपनाने से संकट में फंसे नेपाल के व्यापारी

Thu, 17 Nov 2016 10:36 PM IST
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला Updated Thu, 17 Nov 2016 10:36 PM IST
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Indian currency adoption in distress Nepalese businessman
दार्चुला (नेपाल) के व्यवसायी पुष्करराज जोशी - फोटो : अमर उजाला

भारतीय शहरों, गांवों और कस्बों में नोटबंदी के बाद जिस तरह की अफरा-तफरी का माहौल है, उससे कहीं ज्यादा नेपाल में मची है। मुक्त व्यापार और दोनों देशों में एक-दूसरे की मुद्रा के प्रचलित होने का खामियाजा नेपाल के व्यापारी भी भुगत रहे हैं। नेपाल के दार्चुला जिला मुख्यालय में भारत की तरह ही नेपाल के व्यापारियों को भी बाजार प्रभावित होने की आशंका है। उससे ज्यादा विकट स्थिति यह है कि कई व्यापारियों के पास 1000 और 500 के नोट जमा हैं। इन नोटों को बदलने का संकट खड़ा हो गया है।

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भारत-नेपाल के सीमावर्ती नगरों और कस्बों में समान रूप से दोनों देशों की मुद्रा प्रचलित है। भारत से इन इलाकों को सीमेंट, खाद्य सामग्री, रेडीमेड कपड़ों को ले जाया जाता है, जबकि नेपाल की बाजारों में वहां आने वाले मल्टीनेशनल कंपनियों के उत्पाद को भारतीय ग्राहक बड़ा बाजार उपलब्ध कराते आए हैं। दोनों देशों के बीच मैत्री संबंधों के कारण आवागमन में किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अब दार्चुला के व्यापारी बुरी तरह सहमे हैं। भारत में चल रहे ताजा माहौल को लेकर रोज उनमें चर्चा होती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन व्यापारियों के पास 1000 और 500 का नोट है, वह नेपाल के किसी भी बैंक में नहीं बदल पा रहा है।
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दार्चुला के व्यापार संघ के अध्यक्ष सुरेश थापा का कहना है कि भारत एवं नेपाल में मुक्त व्यापार की व्यवस्था है। भारत सरकार के फैसले से नेपाल के व्यापारियों, मजदूरों, किसानों पर असर पड़ गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय बैंकों में नेपाल के नागरिकों के पुराने नोट बदलने की सुविधा मिलनी चाहिए। नेपाल सिविल सोसायटी के अध्यक्ष पुष्कर राज जोशी का कहना है कि यदि भारत सरकार नेपाल के लोगों को अप्रचलित नोट बदलने की सुविधा नहीं देती है तो यहां के लोग आर्थिक संकट में आ जाएंगे। नेपाल वाणिज्य संघ के उपाध्यक्ष इंद्रदेव पंत ने कहा कि जल्द ही व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल भारतीय अधिकारियों से मिलेगा तथा समस्या के निदान की मांग करेगा। वहीं, भारतीय ग्राहकों के नहीं पहुंचने से नेपाल के दार्चुला बाजार में बिक्री में भी 30 से 40 फीसदी की गिरावट आ गई है।

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