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बढ़ती जा रही गांव छोड़ने वालों की संख्या
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी
Updated Wed, 07 Sep 2016 10:36 PM IST
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मल्लाभैंसकोट में वीरान पड़ी बाखली
- फोटो : अमर उजाला
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देश की आजादी के 70 साल बाद भी पहाड़ के गांवों में मूलभूत सुविधाएं नहीं जुट पाई है। पलायन रोकने के दावों के बीच गांव छोड़ने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। नाचनी के मल्ला भैंसकोट क्षेत्र में सड़क बनने के बाद तीन गांवों के 36 परिवारों ने गांव छोड़ा है। सड़क बनने के बाद भी लगातार हो रहे पलायन से साफ है कि केवल सड़क न तो विकास का आधार है और न अकेले दम पर मोटर सड़क से पलायन रुक सकता है। इसके लिए बेहतर शिक्षा, अच्छे अस्पताल, व्यवसाय के साधन उपलब्ध कराने होंगे।
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मल्ला भैंसकोट क्षेत्र में 90 के दशक से लोगों का गांव छोड़ने का क्रम चल रहा है। वर्ष 2003 में क्षेत्र सड़क से जुड़ा। सड़क बनने के बाद अन्य आवश्यकताओं के लिए लोग गांव छोड़ रहे हैं। वर्ष 2006 में त्रिलोक सिंह, नरेंद्र सिंह, जगत सिंह शाही समेत कई लोग हल्द्वानी, दिल्ली और तराई क्षेत्र में बस गए। सड़क बनने के बाद 200 परिवार वाले मल्ला भैंसकोट से 15 परिवार अन्यत्र जा चुके हैं।
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190 परिवार वाले चामी भैंसकोट से 12 और 74 परिवार वाले बसानी से 9 परिवारों ने गांव छोड़ा है। ग्रामीण कहते हैं कि बेहतर शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, कोचिंग, स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। रोजगार के साधनों के अभावों में लोग गांवों से बाहर निकल रहे हैं।
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हालात गांवों को आबाद रखने लायक नहीं
क्षेत्र पंचायत सदस्य सरुली देवी, प्रधान नंदी देवी, जीवन शाही, देवकी देवी, विक्की शाही, खड़क सिंह, खुशाल शाही कहते हैं कि क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता नहीं होने से 40 बच्चे 12 किमी दूर नाचनी पढ़ने आ रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधा के लिए 80 किमी दूर पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ती है। ये हालात गांवों को आबाद रखने लायक नहीं रह गए हैं।