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Pithoragarh News: स्वरोजगार के लिए होम स्टे में बढ़ रहा युवाओं का रुझान
Sat, 18 Nov 2023 10:24 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 18 Nov 2023 10:24 PM IST
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धारचूला के दारमा घाटी के दांतू गांव में बना होम स्टे। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में स्वरोजगार के लिए युवाओं का रुझान होम स्टे की ओर बढ़ रहा है। सरकार की ओर से भी लोगों को होम स्टे से जोड़ने के लिए काफी कवायद की जा रही है। जिले के आठों विकास खंड में होम स्टे की संख्या 714 है।
पर्यटक स्थल मुनस्यारी, धारचूला, बेड़ीनाग में लोगों का रुझान होम स्टे की ओर बढ़ा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुनस्यारी के सरमोली से शुरू हुई होम स्टे की संस्कृति वर्तमान में युवाओं को लुभा रही है। जिले में सर्वाधिक होम स्टे 492 धारचूला विकास खंड में हैं। यहां व्यास और दारमा घाटी में ग्रामीण होम स्टे से अच्छी आय कर रहे हैं। उनकी संस्कृति, रहन सहन का भी प्रचार-प्रसार हो रहा है। दूसरे स्थान पर मुनस्यारी में 94 होम स्टे हैं। नाग संस्कृति के केंद्र बेड़ीनाग में 56, विण में 25, मूनाकोट में 20, गंगोलीहाट में 10, कनालीछीना में 14 और डीडीहाट में तीन होम स्टे बनाए गए हैं। वर्ष 2018-19 में उत्तराखंड के सभी जिलों में होम स्टे की संख्या 965 थी जो वर्तमान में बढ़कर करीब चार हजार हो गई हैं।
बाक्स
होम स्टे में दारमा घाटी सबसे आगे
पिथौरागढ़। होम स्टे बनाने के मामले में धारचूला सबसे आगे हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अकेले दारमा घाटी में 335 होम स्टे बने हैं। घाटी के नागलिंग में 50, बौन में 49 समेत 15 गांवों में होम स्टे बने हैं। व्यास घाटी के सात गांवों में 88 होम स्टे हैं। चौदास घाटी में 56 और धारचूला देहात में 13 होम स्टे बनाए गए हैं। संवाद
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कोट:
अधिकाधिक लोगों को होम स्टे योजना का लाभ उठाने को प्रेरित किया जा रहा है। होम स्टे बनाने के लिए कैंप भी लगाए जा रहे हैं।
- कीर्ति आर्या, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पिथौरागढ़।
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पर्यटक स्थल मुनस्यारी, धारचूला, बेड़ीनाग में लोगों का रुझान होम स्टे की ओर बढ़ा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुनस्यारी के सरमोली से शुरू हुई होम स्टे की संस्कृति वर्तमान में युवाओं को लुभा रही है। जिले में सर्वाधिक होम स्टे 492 धारचूला विकास खंड में हैं। यहां व्यास और दारमा घाटी में ग्रामीण होम स्टे से अच्छी आय कर रहे हैं। उनकी संस्कृति, रहन सहन का भी प्रचार-प्रसार हो रहा है। दूसरे स्थान पर मुनस्यारी में 94 होम स्टे हैं। नाग संस्कृति के केंद्र बेड़ीनाग में 56, विण में 25, मूनाकोट में 20, गंगोलीहाट में 10, कनालीछीना में 14 और डीडीहाट में तीन होम स्टे बनाए गए हैं। वर्ष 2018-19 में उत्तराखंड के सभी जिलों में होम स्टे की संख्या 965 थी जो वर्तमान में बढ़कर करीब चार हजार हो गई हैं।
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होम स्टे में दारमा घाटी सबसे आगे
पिथौरागढ़। होम स्टे बनाने के मामले में धारचूला सबसे आगे हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अकेले दारमा घाटी में 335 होम स्टे बने हैं। घाटी के नागलिंग में 50, बौन में 49 समेत 15 गांवों में होम स्टे बने हैं। व्यास घाटी के सात गांवों में 88 होम स्टे हैं। चौदास घाटी में 56 और धारचूला देहात में 13 होम स्टे बनाए गए हैं। संवाद
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कोट:
अधिकाधिक लोगों को होम स्टे योजना का लाभ उठाने को प्रेरित किया जा रहा है। होम स्टे बनाने के लिए कैंप भी लगाए जा रहे हैं।
- कीर्ति आर्या, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पिथौरागढ़।