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37 साल में मात्र एक दिन के लिए आया डॉक्टर
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी
Updated Sun, 27 May 2018 10:51 PM IST
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डॉक्टर विहीन क्वीटी का एलोपैथिक अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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दूरस्थ क्षेत्र में ग्रामीण जनता की स्वास्थ्य की देखभाल के लिए खोले गए क्वीटी के एलोपैथिक चिकित्सालय की हालत बेहद खराब है। 37 साल पहले खुले इस अस्पताल में इतने लंबे अंतराल में केवल एक दिन डॉक्टर के दर्शन हुए। वर्तमान में अस्पताल वार्डब्वाय के भरोसे संचालित हो रहा है।
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अस्पताल की स्थापना के लिए क्षेत्र के लोगों ने लंबी लड़ाई लड़ी। इसके लिए क्षेत्र के लोगों ने कई बार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के भी चक्कर लगाए। तत्कालीन विधायक चारु चंद्र ओझा के प्रयासों से 11 नवंबर 1981 को क्वीटी में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना की गई, लेकिन यह अस्पताल लोगों की उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया।
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क्वीटी के बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह रावत बताते हैं कि अस्पताल के उद्घाटन के दिन एक डॉक्टर अस्पताल पहुंचे थे। उस दिन कुछ लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी डॉक्टर ने किया, लेकिन दूसरे दिन से डॉक्टर अस्पताल में नहीं दिखे। हुकमरान केवल उद्घाटन के लिए ही डॉक्टर को क्वीटी लाए थे। तब से अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई। अस्पताल में डॉक्टरों और फार्मेसिस्टों के दो-दो पद सृजित हैं, लेकिन एक की भी तैनाती नहीं है। रांथी और बला उप स्वास्थ्य केंद्र के फार्मेसिस्टों की एक-एक सप्ताह के लिए क्वीटी अस्पताल में ड्यूटी लगाई जाती है। अस्पताल में एक वार्डब्वाय और एक स्वच्छक तैनात है। क्वीटी और मडलकिया न्याय पंचायत की 30 ग्राम पंचायतों की करीब 15000 आबादी इस अस्पताल पर निर्भर हैं।
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30 साल तक पंचायतघर में चला अस्पताल
नाचनी। क्वीटी अस्पताल स्थापना के बाद से ही अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। अस्पताल वर्ष 2011 तक पंचायत घर के एक कक्ष में संचालित होता रहा। वर्ष 2012 में अस्पताल का भवन बना। यह भवन भी घटिया निर्माण कार्य के लिए चर्चाओं में रहा। उद्घाटन से पहले भवन का छज्जा क्षतिग्रस्त हो गया था।
नए चिकित्सकों की तैनाती होने जा रही है। जिले को चिकित्सक मिलने पर क्वीटी अस्पताल को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए शासन को भी प्रस्ताव भेजा गया है। -डॉ.ऊषा गुंज्याल, मुख्य चिकित्साधिकारी पिथौरागढ़