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Pithoragarh News: अस्पतालों की ओटी में लगा ताला, उपकरण खा रहे हैं जंग
Tue, 13 Aug 2024 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 13 Aug 2024 10:59 PM IST
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पिथौरागढ़। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों के बीच सीमांत जिले में हालात चिंताजनक हैं। जिले में संचालित किसी भी सीएचसी में सर्जन की तैनाती नहीं है। ऐसे में ओटी (ऑपरेशन थियेटर) में ताले लटकने से लाखों के उपकरण जंग खा रहे हैं और मरीज ऑपरेशन के लिए 55 से 130 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
भारत-नेपाल सीमा पर धारचूला में संयुक्त चिकित्सालय के साथ ही डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग और मुनस्यारी में सीएचसी हैं। सभी अस्पतालों में सर्जन का पद स्वीकृत है। स्थानीय स्तर पर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हर अस्पताल में ओटी का निर्माण किया गया है और लाखों रुपये के उपकरण खरीदे गए हैं। सर्जन की तैनाती न होने से किसी भी अस्पताल में ओटी का संचालन नहीं हो रहा है। ओटी में ताले लटके हैं और यहां खरीदे उपकरण शोपीस बने हैं। इन अस्पतालों में हर रोज 650 से अधिक मरीज बेहतर उपचार की उम्मीद में पहुंचते हैं। ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी बन गया है। ऐसे में मरीज ऑपरेशन के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगा रहे हैं। संवाद
निश्चेतक के बगैर ऑपरेशन करना मुश्किल
पिथौरागढ़। जिले में संचालित संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में सर्जन के साथ ही ऑपरेशन के लिए निश्चेतक का पद भी स्वीकृत है। किसी भी अस्पताल में निश्चेतक की तैनाती नहीं है। विशेषज्ञों की कमी से सीमांत के अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई बार मांग के बाद भी इन अस्पतालों में सर्जन और निश्चेतक की तैनाती नहीं हो रही इसकी सीधी मार मरीजों को सहनी पड़ रही है।
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विशेषज्ञों की तैनाती का प्रस्ताव फाइलों में सिमटा
पिथौरागढ़। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में ओटी के संचालन के लिए जरूरी सर्जन और निश्चेतक की तैनाती के लिए साल में कम से कम से कम दो बार शासन में पत्र भेजा जा रहा है। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है, लेकिन दोनों विशेषज्ञों की तैनाती का प्रस्ताव फाइलों में सिमटकर रह गया है।
कोट
संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में सर्जन और निश्चेतक की नियुक्ति के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। दोनों विशेषज्ञों की तैनाती न होने से ओटी का संचालन नहीं हो रहा है। नियुक्ति शासन स्तर पर ही संभव है। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
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भारत-नेपाल सीमा पर धारचूला में संयुक्त चिकित्सालय के साथ ही डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग और मुनस्यारी में सीएचसी हैं। सभी अस्पतालों में सर्जन का पद स्वीकृत है। स्थानीय स्तर पर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हर अस्पताल में ओटी का निर्माण किया गया है और लाखों रुपये के उपकरण खरीदे गए हैं। सर्जन की तैनाती न होने से किसी भी अस्पताल में ओटी का संचालन नहीं हो रहा है। ओटी में ताले लटके हैं और यहां खरीदे उपकरण शोपीस बने हैं। इन अस्पतालों में हर रोज 650 से अधिक मरीज बेहतर उपचार की उम्मीद में पहुंचते हैं। ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी बन गया है। ऐसे में मरीज ऑपरेशन के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगा रहे हैं। संवाद
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निश्चेतक के बगैर ऑपरेशन करना मुश्किल
पिथौरागढ़। जिले में संचालित संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में सर्जन के साथ ही ऑपरेशन के लिए निश्चेतक का पद भी स्वीकृत है। किसी भी अस्पताल में निश्चेतक की तैनाती नहीं है। विशेषज्ञों की कमी से सीमांत के अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई बार मांग के बाद भी इन अस्पतालों में सर्जन और निश्चेतक की तैनाती नहीं हो रही इसकी सीधी मार मरीजों को सहनी पड़ रही है।
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विशेषज्ञों की तैनाती का प्रस्ताव फाइलों में सिमटा
पिथौरागढ़। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में ओटी के संचालन के लिए जरूरी सर्जन और निश्चेतक की तैनाती के लिए साल में कम से कम से कम दो बार शासन में पत्र भेजा जा रहा है। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है, लेकिन दोनों विशेषज्ञों की तैनाती का प्रस्ताव फाइलों में सिमटकर रह गया है।
कोट
संयुक्त चिकित्सालय और सीएचसी में सर्जन और निश्चेतक की नियुक्ति के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। दोनों विशेषज्ञों की तैनाती न होने से ओटी का संचालन नहीं हो रहा है। नियुक्ति शासन स्तर पर ही संभव है। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।