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होली में कुकला और ज्या का स्वाद जरूरी

Sun, 20 Mar 2016 10:53 PM IST
संजू पंत /अमर उजाला, डीडीहाट
संजू पंत /अमर उजाला, डीडीहाट Updated Sun, 20 Mar 2016 10:53 PM IST
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Holly must taste of banana and chord
शौका जनजाति की होली - फोटो : अमर उजाला

शौका जनजाति की होली के समय चावल के आटे से बना कुकला, भुने हुए चावलों से तैयार भुमला, घुइयां के डंठलों को सुखाकर बनने वाले पत्यूड़ और नमकीन चाय ज्या को जरूर परोसा जाता है। इस सामग्री को तैयार करने के लिए शौका महिलाएं 15 दिन से तैयारी कर लेती हैं। होली के दिनों में होल्यारों को यह सामग्री परोसी जाती है। डीडीहाट में शौकाओं के 300 परिवार रहते हैं। 1960 में तिब्बत व्यापार बंद होने के बाद शौकाओं ने कुमाऊं के कई कस्बों और नगरों को अपने व्यवसाय के लिए चुना। डीडीहाट उनमें से मुख्य है।

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शौकाओं की होली की चीर अंबेडकर वार्ड में नवीन टोलिया के आंगन में बांधी जाती है। होली के समय इस चीर को घर-घर घुमाया जाता है। शौकाओं की होली में भी राम, कृष्ण, शिव की स्तुति के ही गीत होते हैं। कुमाऊं के अन्य स्थानों पर प्रचलित होली गीतों की तरह ही शौकाओं की होली में भी भक्ति का समावेश रहता है। नगर में रहने वाले हर घर और परिवार तक होल्यार पहुंचते हैं।
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पहले यहां शौकाओं की आबादी कम थी। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ने लगी है। इस कारण होल्यारों को रोजाना चार किलोमीटर तक होली गाते हुए पैदल चलना पड़ता है। जब शौका परिवारों की संख्या कम थी तब यह लोग होली दल को समाज के अन्य लोगों के घरों में भी ले जाते थे। अब परिवारों की संख्या बढ़ गई है तो यह संभव नहीं हो पाता। होली के दिन हर घर में होल्यारों को कुकला, भुमला, पत्यूड़, ज्या जरूर परोसी जाती है। इन व्यंजनों का स्वाद अद्भुत होता है। 
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होली की परंपरा में बदलाव नहीं आया
शौका समाज के बुजुर्ग लक्ष्मण सिंह जंगपांगी का कहना है कि होली की परंपरा में कोई बदलाव नहीं आया है। जोहारी शौकाओं में जिस तरह की परंपरा प्रचलित है, उसे हूबहू अपनाया गया है। वह कहते हैं कि नई पीढ़ी ने परंपरा को जीवित रखने के प्रति सजगता दिखाई है। वह कहते हैं कि आने वाले समय में भी यह परंपरा इसी तरह चलती रहेगी। 


होली में सामाजिक एकता का प्रदर्शन
शौका समाज के होल्यार जोगा सिंह नित्वाल का कहना है कि होली में सामाजिक एकता की मिसाल दिखती है। किसी भी परिवार को होली से वंचित नहीं किया जाता। इससे एक दूसरे के प्रति आत्मीयता बढ़ती है। वह कहते हैं कि शौका समाज की होली की विशेष परंपरा है। होली के समय जिस की तरह की तैयारी की जाती है, वह बेमिसाल है। 

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