{"_id":"6a2ee4ed8eaa5c204e01bbc6","slug":"hill-produce-disappears-from-tanakpur-market-pithoragarh-news-c-229-1-shld1007-140405-2026-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: टनकपुर मंडी से गायब हुए पहाड़ी उत्पाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: टनकपुर मंडी से गायब हुए पहाड़ी उत्पाद
Sun, 14 Jun 2026 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 14 Jun 2026 10:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टनकपुर (चंपावत)। पहाड़ के प्रवेश द्वार टनकपुर मंडी समिति में पिछले कुछ वर्षों से पहाड़ के उत्पाद आलू, संतरा, माल्टा आदि आना बंद हो गया है। किसान सड़कों का जाल बिछने से सीधे हल्द्वानी, बरेली आदि की बड़ी मंडियों की ओर रुख कर रहा है, इससे मंडी की आय का स्रोत वन निगम की लकड़ी का शुल्क हो गया है। मई-जून में नाशपाती आती थी जो इस बार अभी तक नहीं पहुंची है।
पहाड़ के फल और उत्पादों के लिए टनकपुर मंडी प्रमुख है। वर्ष 2001 में मंडी का उद्घाटन हुआ था। इस बीच मंडी में पहाड़ के संतरा, माल्टा, आलू, हरी मिर्च, अदरक आदि खासी मात्रा किसान लाते रहे। अब पहाड़ में सड़कों का जाल बिछने से किसान सीधे ही बड़ी मंडी की ओर रुख करते नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से बहुत की कम मात्रा में उत्पाद मंडी में दर्ज हो रहे हैं।
मंडी सचिव दलीप चंद ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्ष से उत्पाद आना कम हो रहे हैं। वर्ष 2025 में मंडी में नाशपाती 530 क्विंटल, अदरक 82 क्विंटल आए थे। इस बार नाशपाती का सीजन मई-जून आ गया है लेकिन अभी तक नहीं आया है।
विज्ञापन
--
नहीं पहुंची अदरक की खुशबू
टनकपुर मंडी में जनवरी-फरवरी में अदरक भी इस वर्ष नहीं आया। आलू भी अब सीधे बड़ी मंडियों में जा रहा है। संतरा, माल्टा भी आना कम हो गया है। मंडी में निगम की लकड़ी का शुल्क आय का मुख्य स्रोत बना हुआ है। मंडी में अब गेहूं और चावल के दो गोदाम बनाने का प्रस्ताव है। बहरहाल, सड़कों जाल ने से टनकपुर मंडी में अब किसान पहाड़ी उत्पाद काफी कम मात्रा में ला रहे हैं।
विज्ञापन
पहाड़ के फल और उत्पादों के लिए टनकपुर मंडी प्रमुख है। वर्ष 2001 में मंडी का उद्घाटन हुआ था। इस बीच मंडी में पहाड़ के संतरा, माल्टा, आलू, हरी मिर्च, अदरक आदि खासी मात्रा किसान लाते रहे। अब पहाड़ में सड़कों का जाल बिछने से किसान सीधे ही बड़ी मंडी की ओर रुख करते नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से बहुत की कम मात्रा में उत्पाद मंडी में दर्ज हो रहे हैं।
विज्ञापन
मंडी सचिव दलीप चंद ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्ष से उत्पाद आना कम हो रहे हैं। वर्ष 2025 में मंडी में नाशपाती 530 क्विंटल, अदरक 82 क्विंटल आए थे। इस बार नाशपाती का सीजन मई-जून आ गया है लेकिन अभी तक नहीं आया है।
विज्ञापन
नहीं पहुंची अदरक की खुशबू
टनकपुर मंडी में जनवरी-फरवरी में अदरक भी इस वर्ष नहीं आया। आलू भी अब सीधे बड़ी मंडियों में जा रहा है। संतरा, माल्टा भी आना कम हो गया है। मंडी में निगम की लकड़ी का शुल्क आय का मुख्य स्रोत बना हुआ है। मंडी में अब गेहूं और चावल के दो गोदाम बनाने का प्रस्ताव है। बहरहाल, सड़कों जाल ने से टनकपुर मंडी में अब किसान पहाड़ी उत्पाद काफी कम मात्रा में ला रहे हैं।