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Pithoragarh News: जिले में नहीं दिल का डॉक्टर, बाहर इलाज कराना मजबूरी
Sun, 02 Feb 2025 11:26 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 02 Feb 2025 11:26 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले के अस्पतालों में दिल के मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था नहीं है। कार्डियोलॉजिस्ट का पद खत्म होने से दिल के मरीजों के लिए अस्पताल रेफर सेंटर बन गया है। मरीजों को उपचार के लिए हल्द्वानी या फिर बरेली जाना पड़ता है।
जिले के मरीजों को दिल का इलाज मिल सके इसके लिए जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत था। नौ साल पूर्व तक जिले के लोगों को दिल का इलाज मिलता था। चिकित्सक की सेवानिवृत्ति होने के बाद अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी।
सीमांत लोगों को उम्मीद थी कि कभी न कभी कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती होगी। तैनाती तो दूर जिला अस्पताल में आईपीएचएस के मानकों के अनुसार एक वर्ष पूर्व कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही खत्म हो गया। ऐसे में अब दिल के मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने का रास्ता पूरी तरह बंद है। अस्पताल में हृदय संबंधी परेशानी होने पर मरीज जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। फिजिशियन उन्हें मजबूरी में हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। ऐसे में मरीजों को 230 किमी दूर हल्द्वानी या फिर बरेली जाना पड़ता है।
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आईपीएचएस मानकों के अनुसार जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद समाप्त हुआ है। पद सृजित होने के बाद ही हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती संभव है। - डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़।
- दूसरी बार जिला अस्पताल में रोस्टरवार हो रहा गर्भवतियों का इलाज
चंपावत। जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ दूसरी बार गर्भवतियों का इलाज रोस्टरवार कर रही हैं। अस्पताल में तीन जिलों की आठ स्त्री रोग विशेषज्ञों को 10-10 दिन के लिए रोस्टर वार तैनाती दी गई है। रोस्टर के 16 दिसंबर से 27 फरवरी तक है। इसके बाद गर्भवतियों का इलाज नई व्यवस्था से होगा, लेकिन यह रोस्टरवार होगा या कोई स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती होगी।
अस्पताल में जिला अस्पताल रुद्रपुर की डॉ. नम्रता पांडेय 25 जनवरी से तीन फरवरी तक गर्भवतियों का इलाज करेंगी। इसके बाद जिला अस्पताल अल्मोड़ा की प्रियंका लस्पाल चार से 13 फरवरी, सामुदायिक केंद्र किच्छा की डॉ. कनक बनौधा 14 से 23 फरवरी और जिला अस्पताल अल्मोड़ा से डॉ. कृतिका भंडारी 24 फरवरी से पांच मार्च तक रोस्टर वार गर्भवतियों का इलाज करेंगी। अस्पताल में पिछले साल भी नौ स्त्री रोग विशेषज्ञों की 27 जुलाई से 24 अक्तूबर तक गर्भवतियों के प्रसव कराए थे।
कोट
चंपावत अस्पताल लोगों के लिए एकमात्र लाइफ लाइन है। बार-बार रोस्टर वार व्यवस्था के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ की स्थायी तैनाती के प्रयास होने चाहिए। - मदन सिंह अधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, चंपावत।
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चाक चौबंद होनी चाहिए। गंभीर मामलों में गर्भवतियों को रेफर न किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। - अमित गड़कोटी, अधिवक्ता, चंपावत।
कोट
- निदेशालय से लगातार स्त्री रोग विशेषज्ञ की अस्पताल में तैनाती के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. देवेश चौहान, सीएमओ
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जिले के मरीजों को दिल का इलाज मिल सके इसके लिए जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत था। नौ साल पूर्व तक जिले के लोगों को दिल का इलाज मिलता था। चिकित्सक की सेवानिवृत्ति होने के बाद अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी।
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सीमांत लोगों को उम्मीद थी कि कभी न कभी कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती होगी। तैनाती तो दूर जिला अस्पताल में आईपीएचएस के मानकों के अनुसार एक वर्ष पूर्व कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही खत्म हो गया। ऐसे में अब दिल के मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने का रास्ता पूरी तरह बंद है। अस्पताल में हृदय संबंधी परेशानी होने पर मरीज जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। फिजिशियन उन्हें मजबूरी में हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। ऐसे में मरीजों को 230 किमी दूर हल्द्वानी या फिर बरेली जाना पड़ता है।
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आईपीएचएस मानकों के अनुसार जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद समाप्त हुआ है। पद सृजित होने के बाद ही हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती संभव है। - डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़।
- दूसरी बार जिला अस्पताल में रोस्टरवार हो रहा गर्भवतियों का इलाज
चंपावत। जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ दूसरी बार गर्भवतियों का इलाज रोस्टरवार कर रही हैं। अस्पताल में तीन जिलों की आठ स्त्री रोग विशेषज्ञों को 10-10 दिन के लिए रोस्टर वार तैनाती दी गई है। रोस्टर के 16 दिसंबर से 27 फरवरी तक है। इसके बाद गर्भवतियों का इलाज नई व्यवस्था से होगा, लेकिन यह रोस्टरवार होगा या कोई स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती होगी।
अस्पताल में जिला अस्पताल रुद्रपुर की डॉ. नम्रता पांडेय 25 जनवरी से तीन फरवरी तक गर्भवतियों का इलाज करेंगी। इसके बाद जिला अस्पताल अल्मोड़ा की प्रियंका लस्पाल चार से 13 फरवरी, सामुदायिक केंद्र किच्छा की डॉ. कनक बनौधा 14 से 23 फरवरी और जिला अस्पताल अल्मोड़ा से डॉ. कृतिका भंडारी 24 फरवरी से पांच मार्च तक रोस्टर वार गर्भवतियों का इलाज करेंगी। अस्पताल में पिछले साल भी नौ स्त्री रोग विशेषज्ञों की 27 जुलाई से 24 अक्तूबर तक गर्भवतियों के प्रसव कराए थे।
कोट
चंपावत अस्पताल लोगों के लिए एकमात्र लाइफ लाइन है। बार-बार रोस्टर वार व्यवस्था के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ की स्थायी तैनाती के प्रयास होने चाहिए। - मदन सिंह अधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, चंपावत।
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चाक चौबंद होनी चाहिए। गंभीर मामलों में गर्भवतियों को रेफर न किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। - अमित गड़कोटी, अधिवक्ता, चंपावत।
कोट
- निदेशालय से लगातार स्त्री रोग विशेषज्ञ की अस्पताल में तैनाती के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. देवेश चौहान, सीएमओ