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Pithoragarh News: आपदाकाल में 150 गर्भवतियों का कवच बना स्वास्थ्य विभाग
Mon, 11 Aug 2025 10:47 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 11 Aug 2025 10:47 PM IST
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पिथौरागढ़। स्वास्थ्य विभाग ने आपदाकाल में अपने दावों को धरातल पर उतारकर गर्भवतियों को राहत पहुंचाई। विभाग ने बीते दो महीने में 150 गर्भवतियों को प्रसव के लिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया। यहां उनका सुरक्षित प्रसव कराया गया।
दरअसल आपदा की दृष्टि संवेदनशील जिले में स्वास्थ्य विभाग ने आपदाकाल में गर्भवतियों की सुरक्षा और सहूलियत के मद्देनजर उनका अस्पतालों में प्रसव कराने की निर्णय लिया था। दो महीने पूर्व जिले भर में 350 गर्भवतियां चिह्नित की गईं जिनकी प्रसव की संभावित तिथि 15 जून से सितंबर तक थी। आशा कार्यकर्ता और संबंधित क्षेत्र की एएनएम को गर्भवतियों को प्रसव के लिए स्थानीय अस्पतालों तक लाने की जिम्मेदारी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग ने इन दावों को हकीकत में बदला है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक 15 जून से 31 जुलाई तक 150 गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाकर इनका सुरक्षित प्रसव कराया है। अस्पतालों में प्रसव कराकर विभाग ने जच्चा-बच्चा को सुरक्षा देने के साथ इन्हें घर तक भी पहुंचाया। विभाग की इस पहल से गर्भवतियों के साथ ही उनके परिजनों को राहत मिली है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक हर गर्भवती की निगरानी की जा रही है।
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बंद और बदहाल सड़कों ने बढ़ाई दिक्कत
बंद और बदहाल सड़कों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ ही गर्भवतियों और उनके परिजनों की दिक्कत बढ़ाई है। आए दिन जिले की ग्रामीण सड़कों के बंद होने का सिलसिला जारी है। 10 से अधिक ग्रामीण सड़कों पर लंबे समय से आवाजाही ठप है। ऐसे में क्षेत्र की गर्भवतियों को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाना विभाग, स्वास्थ्य कर्मियों और परिजनों के लिए चुनौती बन गया है। बमुश्किल गर्भवतियों को डोली के सहारे या पैदल सफर कर प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
आपदाकाल में होने वाले प्रसव की सूची पहले ही तैयार की गई थी। विभाग हर गर्भवती को प्रसव की संभावित तिथि से पूर्व अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा है। परिजनों का भी इसमें साथ मिल रहा है। हर गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराना विभाग की प्राथमिकता है। - डॉ. एसएसन नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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दरअसल आपदा की दृष्टि संवेदनशील जिले में स्वास्थ्य विभाग ने आपदाकाल में गर्भवतियों की सुरक्षा और सहूलियत के मद्देनजर उनका अस्पतालों में प्रसव कराने की निर्णय लिया था। दो महीने पूर्व जिले भर में 350 गर्भवतियां चिह्नित की गईं जिनकी प्रसव की संभावित तिथि 15 जून से सितंबर तक थी। आशा कार्यकर्ता और संबंधित क्षेत्र की एएनएम को गर्भवतियों को प्रसव के लिए स्थानीय अस्पतालों तक लाने की जिम्मेदारी दी गई।
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स्वास्थ्य विभाग ने इन दावों को हकीकत में बदला है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक 15 जून से 31 जुलाई तक 150 गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाकर इनका सुरक्षित प्रसव कराया है। अस्पतालों में प्रसव कराकर विभाग ने जच्चा-बच्चा को सुरक्षा देने के साथ इन्हें घर तक भी पहुंचाया। विभाग की इस पहल से गर्भवतियों के साथ ही उनके परिजनों को राहत मिली है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक हर गर्भवती की निगरानी की जा रही है।
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बंद और बदहाल सड़कों ने बढ़ाई दिक्कत
बंद और बदहाल सड़कों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ ही गर्भवतियों और उनके परिजनों की दिक्कत बढ़ाई है। आए दिन जिले की ग्रामीण सड़कों के बंद होने का सिलसिला जारी है। 10 से अधिक ग्रामीण सड़कों पर लंबे समय से आवाजाही ठप है। ऐसे में क्षेत्र की गर्भवतियों को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाना विभाग, स्वास्थ्य कर्मियों और परिजनों के लिए चुनौती बन गया है। बमुश्किल गर्भवतियों को डोली के सहारे या पैदल सफर कर प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
आपदाकाल में होने वाले प्रसव की सूची पहले ही तैयार की गई थी। विभाग हर गर्भवती को प्रसव की संभावित तिथि से पूर्व अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा है। परिजनों का भी इसमें साथ मिल रहा है। हर गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराना विभाग की प्राथमिकता है। - डॉ. एसएसन नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़