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धापा गांव के आधा दर्जन परिवारों ने गुफा में बिताई रात

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 12:21 AM IST
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Half a dozen families of Dhapa village spent the night in the cave
गांधी नगर में बहादुर राम का परिवार सामान लेकर स्कूल में बने राहत कैंप में जाता। संवाद न्यूज एजेंस - फोटो : PITHORAGARH
मुनस्यारी/पिथौरागढ़। मुनस्यारी में बारिश के कारण धापा गांव खतरे की जद में आ गया है। यहां के छह परिवारों ने मकानों के जमींदोज होने के भय से मंगलवार की रात गुफा में बिताई। सुबह होने पर सभी परिवारों ने खेतों में टेंट खड़े किए और सभी परिवार टेंटों में रह रहे हैं।
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धापा गांव में 47 परिवार भूस्खलन के कारण खतरे में हैं। आपदा के भय से 41 परिवार तीन दिन पूर्व ही शिफ्ट हो गए थे। इनमें से कुछ परिवारों ने प्राथमिक स्कूल में, कुछ ने आंगनबाड़ी केंद्र में तो अधिकांश लोगों ने रिश्तेदारों के घरों में शरण ली है। मंगलवार को बारिश से खतरा पैदा हो गया। इससे डरे हीरा सिंह, कुंती देवी, दीवान सिंह, ललित सिंह, केदार सिंह और हरीश सिंह के परिवारों ने रात में ही मकान छोड़कर समीप ही पहाड़ी पर स्थित एक गुफा में रात बिताई। सुबह होने पर सभी परिवारों ने सुरक्षित स्थानों पर टेंट लगाए। अब सभी परिवार टेंटों में रह रहे हैं। धापा गांव के पूर्व प्रधान महिमन सिंह (मुन्ना) ने बताया कि गांव के बीच में काफी भूस्खलन हो रहा है। क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षक ने वहां तक पहुंचने का प्रयास किया था लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण नहीं जा सके। उन्होंने बताया कि खतरा बना हुआ है। अभी तक टेंटों में रह रहे परिवारों को मदद नहीं मिल पाई है। उन्होंने प्रशासन से टैंटों में रह रहे सभी परिवारों को खाद्यान्न सहित अन्य मदद देने की मांग की है।
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गांधीनगर के खतरे की जद में आया परिवार स्कूल में शिफ्ट
मुनस्यारी। मुनस्यारी के गांधीनगर में भूस्खलन के कारण बहादुर राम का मकान की खतरे की जद में आ गया। परिवार के सभी सदस्यों ने प्राथमिक पाठशाला गांधीनगर में शरण ली है। परिवार में पांच सदस्य हैं। सीमा देवी ने बताया कि उनका मकान खतरे में हैं। बारिश के समय डर बना रहता है।
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पिछले साल भी भूस्खलन हुआ था। उन्होंने प्रशासन से उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की है। इसके अलावा बलवीर राम ने भी परिवार के सदस्यों के साथ रिश्तेदार के घर में शरण ली है। उधर धापा गांव में भूस्खलन के कारण मकान खतरे में हैं। खतरे में आए परिवारों ने टेंट में शरण ली है।
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