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हाट कालिका के दरबार में हुई महापूजा
Sat, 09 Mar 2019 05:44 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Sat, 09 Mar 2019 05:44 PM IST
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गंगोलीहाट के हाट कालिका शक्तिपीठ में महापूजा के अवसर पर हवन करते लोग।
- फोटो : पिथौरागढ़
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गंगोलीहाट की महाकाली शक्तिपीठ में शुक्रवार को महापूजा का आयोजन किया गया। महापूजा का आयोजन मंदिर के पुजारी रावल उपजाति के लोग करते हैं।
महापूजा के कार्यक्रम सुबह तड़के 4 बजे से प्रारंभ हो गए। सुबह 7 बजे मंदिर के पुरोहित दीप पंत, पंकज पंत ने यजमान कैप्टन राजेंद्र सिंह रावल और उनकी धर्मपत्नी हेमा रावल के हाथों मां भगवती को पंचामृत स्नान कराया। पंचामृत स्नान के बाद ब्राह्मणों को क्षेत्र के शक्तिस्थलों, शिव स्थलों में पूजा के लिए रवाना किया गया। सुबह से लोगों का मंदिर में जुटना शुरू हो गया। मां को भोग लगाने के लिए नाना प्रकार के सात्विक व्यंजन बनाए गए।
दोपहर करीब दो बजे से हवन प्रारंभ हुआ। पंडित प्रकाश चंद्र जोशी ने यज्ञ संपन्न कराया। आयोजक रावल परिवार ने पूर्णाहुति दी। हवन संपन्न होने के बाद मंदिर में विशेष पूजन किया गया। रात 9 बजे मां को भोग लगाने के बाद कन्यापूजन कराया गया। ब्रह्मभोज के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। रात करीब 12 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद हुए। महापूजा का आयोजन मंदिर के पुजारी रावल उपजाति के लोग करते हैं। मंदिर के निकट रावलगांव में पुजारी समुदाय का सौ से अधिक परिवारों का गांव है। पुजारी लोग मनौती पूरी होने पर महापूजा का आयोजन करते हैं। लगभग हर साल महापूजा होती है।
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महापूजा के कार्यक्रम सुबह तड़के 4 बजे से प्रारंभ हो गए। सुबह 7 बजे मंदिर के पुरोहित दीप पंत, पंकज पंत ने यजमान कैप्टन राजेंद्र सिंह रावल और उनकी धर्मपत्नी हेमा रावल के हाथों मां भगवती को पंचामृत स्नान कराया। पंचामृत स्नान के बाद ब्राह्मणों को क्षेत्र के शक्तिस्थलों, शिव स्थलों में पूजा के लिए रवाना किया गया। सुबह से लोगों का मंदिर में जुटना शुरू हो गया। मां को भोग लगाने के लिए नाना प्रकार के सात्विक व्यंजन बनाए गए।
दोपहर करीब दो बजे से हवन प्रारंभ हुआ। पंडित प्रकाश चंद्र जोशी ने यज्ञ संपन्न कराया। आयोजक रावल परिवार ने पूर्णाहुति दी। हवन संपन्न होने के बाद मंदिर में विशेष पूजन किया गया। रात 9 बजे मां को भोग लगाने के बाद कन्यापूजन कराया गया। ब्रह्मभोज के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। रात करीब 12 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद हुए। महापूजा का आयोजन मंदिर के पुजारी रावल उपजाति के लोग करते हैं। मंदिर के निकट रावलगांव में पुजारी समुदाय का सौ से अधिक परिवारों का गांव है। पुजारी लोग मनौती पूरी होने पर महापूजा का आयोजन करते हैं। लगभग हर साल महापूजा होती है।
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