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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Grwadhar far not become second Malpa

गर्वाधार में कहीं दूसरा मालपा न बन जाए

Wed, 12 Aug 2015 04:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Wed, 12 Aug 2015 04:31 PM IST
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तवाघाट से मांगती जाने वाली रोड पर स्थित गर्वाधार गांव के लोग इस बात से आशंकित हैं कि कहीं इस गांव में मालपा जैसा हादसा न हो जाए। अगस्त 1998 में हुए मालपा हादसे में 60 कैलास मानसरोवर यात्रियों समेत 200 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे हालात गर्वाधार के नीचे की लगातार खिसक रही पहाड़ी की वजह से हो रहे हैं। वर्ष 2013 से लगातार हो रहे भू-कटाव ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। अब यह रक्षाताल से लेकर तल्लाजिप्ती तक के इलाके को अपनी चपेट में ले चुका है। गर्वाधार गांव में 109 परिवार रहते हैं। इनमें से 76 परिवार गंभीर खतरे की जद में हैं। रक्षाताल और तल्लाजिप्ती को मिलाकर परिवारों की संख्या 300 पहुंचती है।
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गर्वाधार में भू-कटाव के कारण अक्सर तवाघाट-मांगती रोड बंद हो जाती है। पहाड़ी से गिरा मलबा लगातार सड़क पर गिरता रहता है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि भू-कटाव रोकने के उपाय नहीं किए गए तो यह इलाका मालपा हादसे को दोहरा सकता है। लोगों ने बताया कि मध्य हिमालय के इन क्षेत्रों में अगस्त और सितंबर में भू-कटाव की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस बार तो जुलाई से ही पहाड़ी का दरकना शुरू हो गया था। अब तक भू-कटाव के दायरे में करीब 500 मीटर का इलाका आ चुका है।
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