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कुंवर दामोदर ने बनाई ग्रीन ब्रिगेड
डा. दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 11 Jul 2015 10:46 PM IST
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ऐसे लोगों की संख्या अंगुलियों में गिनने लायक ही होगी, जो सिर्फ प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के अलावा अन्य किसी विषय में सोचते नहीं हैं, लेकिन डीडीहाट के निकट भनड़ा गांव के शांतिकुंज में रहने वाले कुंवर दामोदर सिंह राठौर का नाम ऐसे ही लोगों में गिना जाता है। उन्होंने 1990 में ग्रीन ब्रिगेड की स्थापना की। खुद हरे रंग की ड्रेस पहनने लगे। इस ग्रीन ब्रिगेड के कमांडर वह खुद बन गए। ग्रीन ब्रिगेड में उन्होंने स्कूली बच्चों, आईटीबीपी के जवानों, समाजसेवकों एवं पर्यावरणप्रेमियों को जोड़ा।
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कुंवर दामोदर अब तक लाखों पौधों का रोपण कर चुके हैं। मैदान से लेकर पहाड़ तक उन्होंने जलवायु और मिट्टी के गुण के हिसाब से पौधों का रोपण करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। चौड़ी पत्ती वाले पौधों को रोपने के लिए एक प्रकार से उन्होंने संकल्प सा लिया है। बांज, बुरांश, उतीस के पौधों को रोपना उनकी प्राथमिकता में है। यह पौधे जमीन की नमी को संरक्षित करते हैं। भूकटाव होने से बचाते हैं। पानी के स्रोतों को जिंदा रखते हैं। उनके विलक्षण काम को देखते हुए वर्ष 2000 में भारत सरकार ने उनको प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कुंवर दामोदर की उम्र 88 वर्ष की हो गई है लेकिन प्रकृति के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ है। वह अब ज्यादा चल-फिर नहीं पाते, लेकिन अपने शांतिकुंज में वह अब विलुप्त हो रही जड़ी-बूटियों के पौधों के संरक्षण के काम में लगे हैं।
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कुंवर दामोदर ने जड़ी-बूटी के पौधों की नर्सरी तैयार कर रखी है, जिन्हें बाद में वह इन पौधों को जंगल में विभिन्न स्थानों पर रोपेंगे। कुंवर दामोदर की पहल पर ही कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में गुंजी में मानसरोवर वन विकसित हो रहा है। कुंवर दामोदर को प्रकृति के सानिध्य में रहते हुए पेड़-पौधों के व्यवहार का गहन अनुभव हो चुका है। वह हर पौधे को संवारते हैं। उसे बड़ा होते देख प्रफुल्लित होते हैं। वह अपने काम से खुश हैं, जिस संकल्प को उन्होंने शुरू किया था, वह किसी न किसी रूप में आगे बढ़ रहा है।
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शांतिकुंज को उन्होंने जैवविविधता केंद्र के रूप में विकसित कर दिया है। वहां पर हर प्रकार के पौधे का रोपण किया गया है। नर्सरी विकसित की गई है। जहां जरूरत होती है, वहां के लिए वह पौधे उपलब्ध कराते हैं। कई अध्येता, वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थी उनके शांतिकुंज में जाते रहते हैं। कुंवर दामोदर उनकी जिज्ञासा को शांत करते हैं और प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देते हैं।