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किले के सुंदरीकरण का काम प्रभावित
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 15 Dec 2016 10:34 PM IST
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नोटबंदी के कारण ठप पड़ा पिथौरागढ़ किले के सुंदरीकरण का काम
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद बैंकोें से पर्याप्त मात्रा में पैसा न मिलने के कारण बड़ी रकम वाले कई काम प्रभावित होने लगे हैं। गोरखा शासन में बने इस किले के सुंदरीकरण के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने 4.54 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की थी, लेकिन नोटबंदी के कारण काम प्रभावित होने लगा है। अब तक निर्माण एजेंसी को 1.50 करोड़ रुपए ही जारी हुए हैं। अभी करीब तीन करोड़ रुपए का काम शेष है।
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इस काम की देखरेख कर रही कंसलटेंसी एजेंसी वेबकॉस के इंजीनियर हिमांशु तिवारी ने बताया कि नोटबंदी के कारण काम प्रभावित हो गया है। इस काम को फरवरी 2017 में पूरा करने का लक्ष्य है। किले के सुंदरीकरण का काम कर रही डगमोरेवा कंपनी के मैनेजर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि काम को समय से पूरा करने के लिए विभिन्न तरह के 38 लोग काम कर रहे हैं। इस काम के लिए जिले के बाहरी शहरों से लकड़ी, पोटास्टोन और अन्य सामग्री लाई जा रही है।
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इन सभी को लाने का भाड़ा, मजदूरों को दी जाने वाली रोज की मजदूरी और स्थानीय खरीदारी के लिए नकद पैसे की आवश्यकता होती है, लेकिन कंपनी का खाता यहां न होने से बैंक पूरी पेमेंट नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए रोजाना 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की जरूरत है, लेकिन कोई भी बैंक इतनी राशि नहीं दे रहा है। ऐसी हालत में किले के सुंदरीकरण का काम समय पूरा कर पाना संभव नहीं होगा।
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पार्किंग निर्माण के काम में भी रुकावट
जिला अस्पताल के सामने बन रहे पार्किंग स्थल के निर्माण में भी नोटबंदी का असर पड़ रहा है। नगरपालिका के ईओ खीमानंद जोशी ने बताया कि नोटबंदी के बाद शुरुआत में सरकारी भुगतान नहीं हो पा रहे थे। अब ठेकेदार के खाते में पैसा ट्रांसफर तो हो रहा है, लेकिन मजदूरों को देने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं मिल पा रही है। इस कारण इन दिनों काम की गति धीमी पड़ गई है।
पालिका के कर्मचारियों के सामने दिक्कत
नगरपालिका के कर्मचारियों का वेतन उनके बैंक खातों में जमा हो चुका है, लेकिन बैंक से सिर्फ दो हजार रुपए ही मिल पा रहे हैं। कर्मचारियों के खाते सहकारी बैंक की सांध्यकालीन शाखा में हैं। ईओ खीमानंद जोशी ने बताया कि भुगतान न मिलने से कर्मचारियों को दिक्कत आ रही है। दो हजार रुपए से गुजारा कर पाना संभव नहीं है।